स्वामी दयानंद सरस्वती की ओर से आधार शिला रखी जाने वाली गोशाला।
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वेदों की ओर लौटो और पाखंड दूर करने का अलख जगाने वाले महान समाज सुधारक महर्षि दयानंद सरस्वती ने प्रदेश्श् में मात्र रेवाड़ी में 17 दिनों तक शहर के नंद सरोवर पर धर्मोपदेश दिया। बताया जाता है कि दयानंद सरस्वती ने देश में महज एक गोशाला की आधारशिला रखी वह भी रेवाड़ी में। आर्य समाज के प्रचार-प्रसार में समर्पित भाव से जुड़े रहे आर्य संस्कृति के सजग प्रहरी तथा प्रख्यात विचारक स्वामी दयानंद देशभर में कहीं भी तीन दिन से ज्यादा नहीं ठहरे किंतु उनका यह सिद्धांत यदुवंशियों के हृदयस्थल कहे जाने वाले रेवाड़ी नगर के प्रस्थान के दौरान उस समय टूट गया जब वे यहां वर्ष 1879 में जयपुर जाते समय रेवाड़ी रियासत के राजा रहे राव युद्घिष्ठर के कहने पर रेवाड़ी में 17 दिनों तक प्रवास किया। इस प्रवास के दौरान स्वामी ने नित्य शहर के ऐतिहासिक नंद सरोवर के किनारे प्रवचन किए।
एक छड़ी उठाकर की थी गोशाला के लिए निशानदेही
17 दिन के प्रवास के बाद जब स्वामी जयपुर के लिए चलने लगे तो राव युुद्घिष्ठर ने राव गोपाल देव चौक के पास खाली भू भाग पर एक छड़ी उठाकर गोशाला की निशानदेही की थी। इसके बाद राव युद्घिष्ठर ने गोशाला का निर्माण कराया। यह गौशाला उसी पावन स्थल पर बनी हुई है तथा आर्य संस्कृति के पोषक एवं पक्षधर स्वामी दयानंद से जुड़ी अनमोल स्मृतियों को अपने आंचल में सहेजे है।
नशे व पाखंड से दूूर करने के लिए किया जागरूक: देशराज आर्य
देशराज आर्य ने बताया कि करीब 17 दिन के प्रवास के दौरान स्वामी दयानंद सरस्वती ने नंद सरोवर पर वेदों की ओर लोटों के प्रवचन दिए। स्वामी ने हमेशा लोगों को नशे व पाखंड से दूर करने के लिए प्रेरित किया। आर्य ने बताया कि स्वामी हरियाणा में महज रेवाड़ी में आए और लंबे समय तक रुके भी।