फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खेड़ा बॉर्डर के धरनास्थल पर फिर बढ़ने लगी किसानों की संख्या

विज्ञापन
खेड़ा बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान। - फोटो : Rewari
विज्ञापन
रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का धरना रविवार को 174 वें दिन जारी रहा। धरनास्थल पर किसानों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी है, लेकिन कोरोना प्रोटोकाल का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसके साथ ही धरनास्थल पर समूह चर्चाओं का दौर भी जारी रहा। किसानों ने कहा कि कृषि कानूनों के वापस तक किसान घर नहीं लौटेंगे।
विज्ञापन

रविवार को किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूूनियन के प्रदेश सचिव रामकिशन महलावत, राजस्थान के किसान नेता राजाराम मील व अमरराम ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा किसानों पर लगातार जुल्म और अत्याचार किए जा रहे हैं। जिससे किसान किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं करेगा। समाज की 36 बिरादरियों की एकजुटता ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब लोग जुल्म नहीं सहेंगे और एकजुट होकर मुकाबला करेंगे। भाजपा की सरकार जवानों और किसानों को आमने-सामने करके आपस में लड़ाना चाहती है। हरियाणा सरकार लगातार किसानों को बदनाम करती आ रही है। किसानों पर कोरोना फैलाने का इल्जाम भी लगाया गया है। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि राज्य में कोरोना बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कारण फैल रहा है। मुख्यमंत्री और सरकार के मंत्री यदि अपनी हठधर्मिता छोड़कर किसानों के खिलाफ उकसाने वाली बयानबाजी, दमन और झूठे मुकदमेबाजी बंद कर देते और कोरोना का सही और प्रभावी ढंग से नियंत्रण करने पर ध्यान केंद्रित करते तो किसानों को भी इस तरह सड़कों पर नहीं उतरना पड़ता। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा केंद्र सरकार से भी अपील करता है कि किसानों को बदनाम करने की साजिशों के बजाय तीनों कृषि कानून वापस लें, एमएसपी पर कानून बनाने की योजना बनाएं, जिससे कि किसान भी अपने घर वापस जा सकें। लेकिन भाजपा की सरकार जानबूझकर किसानों की मांगी पूरी नहीं कर रही है और लगातार किसान आंदोलन को बदनाम करने की चेष्टा कर रही है। इस अवसर पर चौधरी बच्चू सिंह शाहपुर, किशन प्राणपुरा, नवीन सोहलोत व त्रिलोद चंद सहित अन्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें