संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। तेल कंपनी की फ्यूल विंग्स और रोडवेज जीएम के आपसी लेनदेन का मामला अब अदालत पहुंच गया है। 32 लाख रुपये बकाए का भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने गुरुग्राम कोर्ट का सहारा लिया है। इस मामले की पहली सुनवाई 18 फरवरी को हुई थी, जिसमें कोर्ट ने कंपनी की बातों को सुनते हुए संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा है। अब अगली सुनवाई की तिथि 10 जून मुकर्रर की गई है।
फ्यूल विंग्स के निदेशक अभिनंदन सिंह ने कहा कि विवाद तब शुरू हुआ था जब कई रिमाइंडर भेजने के बाद भी भुगतान नहीं करने के कारण 11 अप्रैल 2024 को रेवाड़ी डिपो को डीजल की आपूर्ति बंद कर दी। 11 अप्रैल को चालान गायब होने के कारण भी डीजल आपूर्ति रोक दी गई थी। रोडवेज के महाप्रबंधक ने 14 मार्च को फ्यूल विंग्स के टैंकर को रेवाड़ी से झज्जर और फिर बहादुरगढ़ भेज दिया था। कंपनी का आरोप है कि जब डीजल खराब था तो झज्जर और बहादुरगढ़ डिपो क्यों भेजा गया। 12 अप्रैल को फ्यूल विंग्स को आश्वासन दिया था कि झज्जर डिपो को भेजे गए डीजल (एचएसडी) के बिलों का भुगतान शीघ्र ही कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जीएम ने रोडवेज डिपो में सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए डीजल (एचएसडी) आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। इसके ठीक एक दिन बाद 13 अप्रैल 2024 को महाप्रबंधक कार्यालय द्वारा जारी पत्र संख्या 1383 के माध्यम से फ्यूल विंग्स को सूचित किया गया कि आपूर्ति किए गए डीजल की गुणवत्ता खराब थी, जिसके कारण आपूर्ति आदेश रद्द कर दिया गया है। इसके बाद से ही आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ।
रोडवेज ने सैंपल पानी के बोतल में भरकर दिए थे, जिस पर आईओसीएल के अधिकारियों द्वारा लिखित में कहा गया था कि 18 मार्च 2024 को उनके द्वारा सैंपल खारिज कर दिए गए हैं, क्योंकि सैंपल पानी की बोतल में थे और बिना सील के थे, जिन्हें आईओसीएल प्रयोगशालाओं द्वारा स्वीकार नहीं किया गया, जोकि पेट्रोलियम एमडीजी गाइडलाइंस के खिलाफ था।
पुलिस ने जीएम की शिकायत को किया था रद्द
मार्च 2024 में रेवाड़ी रोडवेज के जीएम ने दो तेल कंपनियों पर खराब डीजल सप्लाई करने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने जांच के बाद मामले में रोडवेज जीएम की तरफ से दोनों कंपनियों पर दर्ज कराई गई एफआईआर को रद्द कर दिया था। पुलिस जांच में कई अहम खुलासे भी हुए थे। पुलिस जांच में सामने आया था कि रोडवेज जीएम की तरफ से तेल जांच कराने को लेकर नियमों का पालन नहीं किया गया था, कई अनियमितताएं बरती गई थीं। फरवरी और मार्च 2024 में बीएस-6 की बसों में लगातार गड़बड़ी सामने आ रही थी। इसके बाद खराब डीजल की सप्लाई का ठीकरा दो कंपनियों पर फोड़ा गया था।
मामले में रोडवेज के जीएम ने कही थी ये बातें
रोडवेज के महाप्रबंधक ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि 12 फरवरी 2024 को डीजल की सप्लाई लगातार चली आ रही थी। जब बसों को मार्ग पर भेजा गया था तो बीएस-6 बसों में ज्यादा धुंआ देने एवं रास्ते में ही ब्रेकअप होने जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगी थी। जब बसों को संबंधित एजेंसी में दिखाया गया था तो उनके द्वारा अवगत कराया गया था की बसें सही हैं। उसमें डाले गए डीजल में कमी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही शिकायत दी गई थी, जिसे रद्द कर दिया गया था।