रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र पाल की अदालत ने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी गौरव को नियमित जमानत प्रदान कर दी है। एफआईआर सितंबर 2024 को दर्ज की गई थी।
अदालत में आरोपी के अधिवक्ता की तरफ से दलील दी गई कि पीड़िता ने बयानों में गौरव के खिलाफ सीधे अपहरण या दुष्कर्म के आरोप नहीं लगाए हैं। अभियोजन के अनुसार भी आरोपी घटनास्थल पर बाद में पहुंचा था। यह भी तर्क दिया कि सह आरोपी को पहले ही इसी अदालत से जमानत मिल चुकी है और वर्तमान आरोपी का मामला भी उसी के समान है। इसके अतिरिक्त आरोपी अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में है तथा बीमारी के चलते उसका इलाज भी चल रहा है।
पीड़िता पक्ष के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था और यदि उसे जमानत दी गई तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि आरोपी का मामला सह आरोपी के समान है जिसे पहले ही जमानत दी जा चुकी है। जांच पूरी हो चुकी है और मुकदमे की सुनवाई शुरू होने में अभी समय लग सकता है। ऐसे में आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है। अदालत ने गौरव क नियमित जमानत प्रदान की। साथ ही शर्त लगाई गई कि आरोपी गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा और अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेगा।