रेवाड़ी। कंवाली गांव में खेल प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से शुरू कराया गया मिनी खेल स्टेडियम भवन निर्माण आज 12 वर्ष बाद भी अधूरा पड़ा है। जहां यह परिसर खिलाड़ियों की प्रगति का केंद्र होना चाहिए था, वहीं आज उखड़ी दीवारें, टूटी छतें, जर्जर पानी टंकी और चारों ओर पसरा मलबा उपेक्षा की गवाही दे रहे हैं।
स्टेडियम के इसी अधूरे ढांचे में खेल नर्सरी के 150 से अधिक खिलाड़ी रोजाना अभ्यास करने आते हैं जिनमें जिला और राज्य स्तर की हॉकी टीम के खिलाड़ी भी शामिल हैं। सुविधाओं के अभाव ने इन प्रतिभाओं को असुरक्षित माहौल में अभ्यास करने को मजबूर कर दिया है।
स्टेडियम में न तो बारिश से बचने की कोई व्यवस्था है और न ही उपकरण सुरक्षित रखने के लिए कमरा है। बारिश होने पर मैदान पानी से भर जाता है और खिलाड़ी भीगकर अभ्यास करने पर विवश हो जाते हैं।
स्टेडियम की पानी की टंकी पूरी तरह खराब हो चुकी है जिससे गर्मी के दिनों में खिलाड़ियों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो जाता है।
चारदीवारी की ऊंचाई इतनी कम है कि जानवर और बाहरी लोग आसानी से मैदान में प्रवेश कर जाते हैं जिससे प्रशिक्षण बाधित होता है और सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है।
ग्रामीणों ने इस मुद्दे को अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष कई बार जोरदार तरीके से उठाया। गांव में रात्रि प्रवास के दौरान भी यह विषय प्रमुखता से रखा गया था। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि मामला सिर्फ कागजों में आगे बढ़ता है, जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
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विभाग को लिखित में अवगत भी कराया
हॉकी कोच वीरेंद्र ने बताया कि मिनी खेल स्टेडियम की बिल्डिंग का निर्माण कार्य अभी तक अधूरा है। हमने इस संबंध में विभाग को लिखित में अवगत भी कराया हुआ है लेकिन अभी तक कार्य पूरा नहीं हुआ। इसके साथ ही स्टेडियम की चारदीवारी की ऊंचाई भी कम है जिसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से और ऊंचा किया जाना बेहद आवश्यक है। आग्रह है कि निर्माण कार्य जल्द पूरा कराया जाए, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर व सुरक्षित सुविधाएं मिल सकें।
वर्जन
मिनी खेल स्टेडियम भवन निर्माण को लेकर क्या समस्या आ रही है, इसे चेक करवाया जाएगा। खिलाड़ियों के लिए विभाग हमेशा प्रतिबद्ध है। -ममता देवी, कार्यवाहक जिला खेल अधिकारी।
मिनी खेल स्टेडियम का भवन। संवाद