रेवाड़ी। चोरी की सूचना देरी से देने के कारण कंपनी बीमा राशि देने से इन्कार नहीं कर सकती। जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने सुनाए फैसले में कहा है कि यदि चोरी की सूचना बीमा कंपनी को देरी से दी गई है तो केवल इस आधार पर क्लेम निरस्त नहीं किया जा सकता।
जिला उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता ने अपनी मोटरसाइकिल चोरी होने की सूचना पुलिस को तुरंत दे दी थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था।
जिला उपभोक्ता आयोग ने कई मामलों की नजीर देते हुए स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता का इंश्योरेंस कंपनी से 56106 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित लेने का अधिकार है। इसके अलावा बीमा कंपनी को 25 हजार रुपये हर्जाना देना होगा। 11 हजार वाद खर्च के रूप में शिकायतकर्ता को 45 दिन के भीतर अदा करना होगा।
उपमंडल बावल के गांव हसनपुर निवासी नवीन कुमार की एक मोटरसाइकिल 26 अगस्त 2018 को चोरी हो गई थी। मोटरसाइकिल चोरी होने के बाद नवीन कुमार ने थाना बावल में चोरी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
रिपोर्ट के दर्ज करने के बाद कंपनी से बीमा राशि की मांग की गई थी। बीमा 12 नवंबर 2017 से 11 नवंबर 2018 तक वैध था। शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी से चोरी हुई मोटरसाइकिल की कीमत लेेनेे के लिए 22 मार्च 2019 को आवेदन किया था। शिकायतकर्ता ने क्लेम निरस्त होने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग में 5 दिसंबर 2022 को शिकायत दायर कर क्लेम की मांग की। संवाद