सीता स्वयंवर का मंचन करते ड्रोमेटिक क्लब के कलाकार। स्त्रोत: आयोजक
रेवाड़ी। रेलवे कॉलोनी स्थित श्रीराम मंदिर रेलवे ड्राॅमेटिक क्लब की ओर से आयोजित 66वें रामलीला उत्सव में पुष्प वाटिका में सीता-राम मिलन और सीता स्वयंवर प्रसंग का मंचन किया गया। रामलीला का उद्घाटन वार्ड-29 के पार्षद भगवान यादव ने किया।
रामलीला में दिखाया गया कि गुरु विश्वामित्र के साथ प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण पुष्प वाटिका में पूजा के लिए फूल लेने पहुंचते हैं। इसी दौरान माता सीता अपनी सखियों के साथ पार्वती की पूजा के लिए वहां फूल लेने आती हैं। प्रभु श्रीराम के दर्शन कर माता सीता को नारद मुनि के वचन याद आते हैं।
इसके बाद राजा जनक की ओर से सीता स्वयंवर की घोषणा की जाती है। शर्त रखी जाती है कि जो भी भगवान शिव का धनुष तोड़ेगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। अनेक राजा धनुष को हिला तक नहीं पाते। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु श्रीराम धनुष उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं कि धनुष टूट जाता है।
इसके बाद क्रोधित हो परशुराम पहुंचते हैं। परशुराम और लक्ष्मण के बीच गंभीर संवाद होता है। प्रभु श्रीराम विनम्रता से परशुराम को शांत कराते हैं। अंत में परशुराम को श्रीराम के अवतार होने का ज्ञान होता है।
रामलीला के अगले प्रसंग में मंथरा कैकेयी को राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगने के लिए उकसाती है। कैकेयी कोप भवन में चली जाती है और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए राजतिलक मांगने का निर्णय लेती है।
राम की भूमिका दिवेश शर्मा, लक्ष्मण की मोहित यादव, सीता की सागर, विश्वामित्र की राजेश शर्मा, जनक की बृजेश शर्मा और परशुराम की महेश कौशिक ने निभाई। वहीं रावण की भूमिका मुकेश भारद्वाज, मंथरा की जितेश और कैकेयी की पायल शर्मा ने निभाई। आयोजन में अन्य कलाकारों ने भी विभिन्न भूमिकाओं के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया।