रेवाड़ी। अंतरराष्ट्रीय सूरज कुंड मेले में भरतमुनि कला केंद्र के कलाकारों ने नाटक ‘राजा मास्टर ड्रामा कंपनी’ का मंचन किया। इस नाटक के जरिये कलाकारों ने संदेश दिया कि जो जिस कार्य में कुशल है, उसे वही कार्य करना चाहिए। ऐसा नहीं करने से बदइंतजामी होती है।
संस्था के निदेशक मदन डागर ने बताया कि यह व्यंग्यात्मक नाटक है। दो वर्षों से कलाकार इसका मंचन करते आ रहे हैं। नाटक की कहानी राजा मास्टर नामक दर्जी के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी टेलरिंग की दुकान बंद करके अधिक पैसा कमाने की चाह में ड्रामा कंपनी खोल लेता है।
उसे लगता है कि मंच पर नाटक करना आसान काम है। उसका शागिर्द दिलेनादान इस योजना में उसका सहयोग करता है। हालात तब बिगड़ते हैं जब ड्रामा कम्पनी के सारे कलाकार मंच पर आने से पहले ही गायब हो जाते हैं।
हड़बड़ी में राजा मास्टर आसपास के रिक्शा चालक, पान बेचने वाली और राह चलते लोगों को पकड़कर नाटक करवाने की कोशिश करता है।
मंच पर अराजकता फैल जाती है, संवाद गलत बोले जाते हैं और पात्र बदल जाते हैं। सबकुछ हास्य में तब्दील हो जाता है। नाटक का संदेश यह है कि लालच में आकर वह काम नहीं करना चाहिए जिसमें न अनुभव हो और न समझ। राजा मास्टर अंत में मंच पर ही स्वीकार करता है कि जो काम किसी को आता है, वही करना चाहिए।
नाटक में राजा मास्टर की भूमिका वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अंकुर खेर, दिलेनादान की भूमिका ललित वर्मा, पत्रकार की भूमिका हिमानी व कशिश बत्रा, गाजीपुरी की भूमिका कर्ण सैनी, चंपाकली की भूमिका कुमारी तानिया, महंगुआ की भूमिका पवन, चंपाकली अम्मा की भूमिका कुमारी मीनाक्षी और सूत्रधार की भूमिका नितिन राठी ने निभाई।