रेवाड़ी। जिले में पहले चरण की डिजिटल जनगणना एक मई से शुरू हो गई लेकिन जनगणना सामग्री वितरण की व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण शिक्षकों को दो दिन जनगणना सामग्री के लिए भटकना पड़ा। ऐसे में अब तीन मई से सुचारू रूप से जनगणना शुरू होगी।
जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को नगर परिषद से जनगणना सामग्री दी जा रही है। यहां जनगणना सामग्री देने की अच्छी व्यवस्था नहीं है। यहां सामग्री वितरण के लिए कोई काउंटर नहीं बनाया गया है। कागजात और अन्य सामग्री इधर-उधर बिखरी हुई थी, जिससे शिक्षकों का पूरा दिन सामग्री तलाशने में बीत गया। दूसरे दिन दो मई को भी यही स्थिति बनी रही।
जनगणना सामग्री समय से नहीं मिलने के कारण जनगणना कार्य तय समय पर शुरू नहीं हो पाया। इसको लेकर शिक्षकों में नाराजगी देखने को मिली। शिक्षकों का कहना है कि नगर परिषद में सामग्री वितरण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई थी। न तो सही तरीके से काउंटर बनाए गए थे। सामान भी व्यवस्थित ढंग से नहीं रखा गया था।
शिक्षकों को खुद ही अपना सामान ढूंढना पड़ा, जिससे उनका काफी समय बर्बाद हुआ। दो दिनों तक शिक्षक केवल सामग्री इकट्ठा करने में ही लगे रहे, जबकि इस दौरान उन्हें जनगणना का काम शुरू कर देना चाहिए था।
शनिवार शाम तक अधिकांश शिक्षकों को जनगणना सामग्री दी जा सकी। इसके बाद कुछ हद तक स्थिति सामान्य हो सकी। शिक्षकों ने बताया कि अब वे रविवार से जनगणना कार्य शुरू करेंगे।
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प्रत्येक शिक्षक को 150 से 250 घरों का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी गई:
प्रत्येक शिक्षक को लगभग 150 से 250 घरों का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे एक महीने के भीतर पूरा करना होगा। ऐसे में पहले ही दो दिन की देरी शिक्षकों के लिए चुनौती बन सकती है। उन्हें अब कम समय में अधिक मेहनत करनी पड़ेगी ताकि निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा किया जा सके। शिक्षकों ने यह भी कहा कि अगर शुरूआत से ही व्यवस्था सही होती, तो वे समय पर अपना काम शुरू कर सकते थे।
डिजिटल व्यवस्था से जुड़ी भी समस्या:
इसके अलावा एक और बड़ी समस्या सामने आई है, जो डिजिटल व्यवस्था से जुड़ी हुई है। कई शिक्षकों के पास पुराने वर्जन के मोबाइल फोन हैं, जो जनगणना से संबंधित एप को सही तरीके से सपोर्ट नहीं करते। ऐसे में उन्हें नया मोबाइल खरीदने के लिए कहा जा रहा है। यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ शिक्षकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। उनका कहना है कि सरकार या संबंधित विभाग को इस समस्या का समाधान करना चाहिए, ताकि सभी शिक्षक बिना किसी परेशानी के अपना कार्य कर सकें।
शिक्षकों ने कहा कि आगे से इस तरह के महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पहले से पूरी तैयारी की जाए और सामग्री वितरण की बेहतर व्यवस्था की जाए। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि कार्य भी सुचारू रूप से पूरा हो सकेगा। जनगणना के तहत जिले में स्व-गणना का चरण पूरा होने के बाद अब प्रगणक घर-घर दस्तक देंगे।
जनगणना टीम के प्रगणक घर-घर दस्तक देंगे। इस बार डिजिटल जनगणना की जा रही है। मोबाइल एप पर लोगों से पूछताछ कर विवरण दर्ज किए जाएंगे।
प्रगणक के रूप में 1,897 शिक्षक तैनात
जनगणना कार्य सुचारू रूप से चलाने के लिए अधिकारियों से लेकर शिक्षकों तक की ड्यूटी लगाई गई है। कुल 1,897 शिक्षकों को प्रगणक के रूप में तैनात किया गया है। फील्ड में प्रगणकों के काम की निगरानी के लिए 312 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं। आपात स्थिति या ड्यूटी से अनुपस्थिति से निपटने के लिए 192 प्रगणकों और 25 सुपरवाइजरों को रिजर्व में रखा गया है। जिले को 1,916 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स (एचएलबी) में बांटा गया है। हर प्रगणक को एक-एक ब्लॉक का जिम्मा सौंपा गया है। 16 से 30 अप्रैल के बीच जिले के 10,136 लोगों ने स्व-गणना का कार्य पूरा किया है।