शिक्षकों को संबोधित करते जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार दहिया। स्रोत : स्कूल
खोल। बुनियादी शिक्षा में परंपरागत पद्धतियों के साथ नवाचारी तरीकों को शामिल कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना होगा। इसके लिए शिक्षकों को रचनात्मकता और नवाचार को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह बात जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार दहिया ने खोल स्थित खंड संसाधन कार्यालय में चल रहे जेबीटी प्रशिक्षण कार्यक्रम के निरीक्षण के दौरान कही।
दहिया ने एफएलएन कार्यक्रम और प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्कूलों में बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत करने के लिए शिक्षकों को नए तरीकों से शिक्षण कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में स्वच्छता, हरियाली और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्कूलों में आवश्यक भौतिक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में स्कूल मुखियाओं और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार करें। बच्चों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाना शिक्षकों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर अनुराधा चौहान ने जेबीटी प्रशिक्षण के दूसरे बैच की गतिविधियों की जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान कार्यवाहक खंड शिक्षा अधिकारी सत्यवीर नाहड़िया, एफएलएन जिला समन्वयक चरण सिंह, ब्लॉक समन्वयक पूजा यादव, मास्टर ट्रेनर मेनका सहित बीआरपी, एबीआरसी और 43 प्रशिक्षु शिक्षक मौजूद रहे।