रेवाड़ी। स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले प्रदेश सरकार की तरफ से स्वच्छ भारत मिशन की टीम को जिले में भेजी जाती है। ताकि जिले की अब तक की स्वच्छता के क्षेत्र में हुए कार्यों की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की जा सके।
स्वच्छ भारत मिशन के उपाध्यक्ष सुभाषचंद्र शुक्रवार को अधिकारियों, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, धार्मिक एवं व्यापारिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से जिले की स्वच्छता के बारे में संवाद करेंगे।
स्वच्छ भारत मिशन की टीम के दौरे के साथ अब यह सवाल भी उठ रहे हैं कि हर साल यह टीम सर्वेक्षण से पहले ही जिले में प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करने क्यों आती है। वहीं, लोग कहते हैं कि टीम हर 3 महीने में जिले में आए और जमीनी स्तर पर देख कर जाए। इससे अधिकारियों पर भी दबाव बनेगा और शहर में सफाई करवाने को लेकर भी तत्परता दिखेगी। 1 साल बाद टीम के आने से मौजूदा परिस्थितियों का कुछ पता ही नहीं चल पाता है।
मौजूदा समय में शहर में जगह-जगह कचरे का ढेर लगे हैं। कुछ समय पहले सफाई अभियान भी चलाया गया। सफाई तो हुई, मगर उन जगहों पर फिर से कूड़े के ढेर लग चुके हैं। यह स्थिति तब है जब विधायक ने खुद सफाई के लिए मोर्चा संभाला हुआ है। हालात यह है कि लाखों रुपये खर्च के बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है।
अधिकारियों से करेंगे जवाब तलब
स्वच्छता अभियान के पहले चरण में छह जिलों को शामिल किया गया है, जिसमें रेवाड़ी भी शामिल है। उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ने के लिए लोगों को प्रेरित भी करेंगे। लोगों को इस मिशन से जोड़ने के लिए वह पहले भी चार बार प्रदेश में स्वच्छता यात्रा निकाल चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान यह पांचवां कार्यक्रम होगा। वह स्वच्छ भारत मिशन की अब तक हुई प्रगति पर अधिकारियों से जवाब तलब करेंगे। नरेंद्र मोदी के देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद स्वच्छ भारत मिशन को लागू किया गया था। हरियाणा ऐसा पहला राज्य है, जहां इसके लिए राज्यस्तरीय कार्यबल का गठन किया गया। इस कार्यबल में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ गैर सरकारी सदस्यों को भी नामित किया गया है। इसके अलावा जिला स्तर पर भी कार्यबल बनाए गए हैं।
कभी भी आ सकती है स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम
नगर परिषद की ओर से स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। स्वच्छ रैंक सुधरने में इस बार भी संशय नजर आ रहा है। गत वर्ष के स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर रैंक में 118 अंकों से पिछड़ गया था, जबकि ओडीएफ रिजल्ट में शहर को डबल प्लस मिला था। स्वच्छ सर्वेक्षण में प्रदेश में गत वर्ष जिला 11वें नंबर पर रहा था। स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर अगस्त माह में शहरी एवं आवास मंत्रालय की ओर से टीम आनी थी, लेकिन विधानसभा चुनाव के चलते टीम का दौरा नहीं हुआ। अब जल्द ही टीम के आने की संभावना जताई जा रही है।
तीन लाख आबादी, सफाई कर्मचारी 320
शहर में तीन लाख की आबादी पर 320 से अधिक सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। आबादी को देखते हुए यह संख्या काफी कम है। करीब 170 सफाई कर्मचारियों की ओर जरूरत है। शहर में कुल वार्डों की संख्या 31 है। कर्मचारियों की कमी की वजह से नगर के अधिकतर वार्डाें में जगह-जगह पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। कई जगह तो कूड़े का डंप भी बन चुका है। नगर के कुछ वार्ड ऐसे भी हैं जिनमें सफाई व्यवस्था पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। सफाईकर्मियों की कमी कूड़े, कचरे के उठान में बहुत बड़ी बाधक बनी हुई है।
वर्ष
रेवाड़ी रैंकिंग
बावल रैंकिंग
धारूहेड़ा रैंकिंग
2017
303
-
-
2018
254
499
541
2019
264
536
716
2020
118
112
141
2021
190
472
123
2022
140
35
16
2023
258
246
186
जिले की साफ-सफाई को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सफाई को लेकर लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। अगर लोग सहयोग करेंगे तभी कुछ हो सकता है। अभियान को लोगों के सहयोग की भी जरूरत है।
-प्रियंका यादव, ब्रांड एंबेसडर, स्वच्छ भारत मिशन, रेवाड़ी।