रेवाड़ी। जिले के सात गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। इन गांवों में दाखोरा, टिंट, टूमना, निमोठ, बोलनी, चिमनावास और मंदौला शामिल हैं। इन गांवों के लोग लंबे समय से उप स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण करने की मांग कर रहे थे।
प्रत्येक गांव में बनने वाले उप स्वास्थ्य केंद्र पर लगभग 46.63 लाख रुपये की लागत आएगी। इस प्रकार सभी सात गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण पर कुल 3 करोड़ 26 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
इन उप स्वास्थ्य केंद्रों के बनने से ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं अपने गांव में ही उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे उन्हें छोटे-मोटे इलाज के लिए दूर कस्बों या शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
ग्रामीणों को अब तक प्राथमिक उपचार, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की जांच, बच्चों की देखभाल और सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता था।
विशेषकर आपात स्थिति में यह दूरी कई बार परेशानी का कारण बनती थी। उप स्वास्थ्य केंद्र खुलने से ग्रामीणों को न केवल समय बल्कि पैसे की बचत होगी।
अभी यहां बनाए जा रहे हैं उप स्वास्थ्य केंद्र : पिछले वर्ष जनवरी 2025 में 12 गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्र (सब हेल्थ सेंटर) के लिए टेंडर जारी किए गए थे।
इनमें गांव बेरवल, छिल्लर, मोहनपुर, रोहड़ाई, मामड़िया आसमपुर, सुठानी, झाबुआ, नेहरूगढ़, सुठानी, नांगल शहबाजपुर, जैतपुर शेखपुर, सुर्खपुर, लुखी में उप स्वास्थ्य केंद्र शामिल थे। खोरी में भी उप स्वास्थ्य केंद्र को मंजूरी मिल चुकी है। संवाद
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पांच हजार की आबादी पर खुलता है उप स्वास्थ्य केंद्र
उप स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बुनियादी इकाई होता है। आम लोगों को उनके गांव के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह केंद्र खोला जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मानकों के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में लगभग 5 हजार की आबादी पर एक उप स्वास्थ्य केंद्र और पहाड़ी या दुर्गम क्षेत्रों में लगभग 3 हजार की आबादी पर एक उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया जाता है। मुख्य उद्देश्य गांव स्तर पर ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है ताकि लोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए दूर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल न जाना पड़े। यहां गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, बच्चों का टीकाकरण, सामान्य रोगों का प्राथमिक उपचार और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जाएगी।
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48 गांवों में है उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने की योजना
स्वास्थ्य विभाग ने 48 गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने की योजना बनाई है। इनमें से 24 हेल्थ सेंटर का प्रस्ताव भेजा गया था। जिन गांव में सब हेल्थ सेंटर बनाने की योजना है, वहां पर जमीन खरीदने की पूरी होने के बाद टेंडर जारी किए जा रहे हैं। वहां पहले स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे किया था। यह देखा गया था कि आसपास स्वास्थ्य सुविधा कैसी है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 48 गांवों को सब हेल्थ सेंटर के लिए चिह्नित किया गया था। इनका प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया था। भविष्य में बाकी बचे सभी हेल्थ सेंटर के टेंडर जारी किए जाएंगे।
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चार पीएचसी के लिए जारी हो चुके है टेंडर
जिले के नाहड़, जाटूसाना और धारूहेड़ा ब्लॉक में चार नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के निर्माण के लिए पिछले दिनों टेंडर जारी हो चुके हैं। गुड़ियानी, जाटूसाना, बख्तापुर और लिलोढ़ गांव में पीएचसी के निर्माण पर 14.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भाड़ावास को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के रूप में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है।
क्या बोले सरपंच
-सरपंच बनने के बाद से यहां उपस्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों को इलाज के लिए कोसली जाना पड़ता है। इससे समय और धन खर्च होता है। गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र खुलसे से ग्रामीणों को सुविधा होगी।-नवल नेहरा, सरपंच, टूमना।
-गांव के लिए 55.50 लाख रुपये पास हुए थे। गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र खुलेगा तो ग्रामीणों को दड़ौली या रेवाड़ी नहीं जाना पड़ेगा। उनको स्वास्थ्य सुविधाएं यहीं उपलब्ध हो जाएंगी।-रमेश देवी, सरपंच, दखोरा।
-सरपंच बनते ही गांव में सभा रखी थी उसमें उपस्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग उठी थी। अभी ग्रामीणों को डहीना व खोल पीएचसी जाना पड़ रहा है। गांव में ही स्वास्थ्य केंद्र खुलेगा तो ग्रामीणों को सुविधा होगी।-रामस्वरूप, सरपंच, निमोठ।
-गांव में पहले से ही जर्जर भवन में स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। कर्मचारियों ने अलग से बिल्डिंग बनाने के लिए जमीन मांगी थी। अब इसका नया भवन बनेगा।- गजल, सरपंच, टींट ।
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वर्जन
बेहतर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सात गांवों में उप-स्वास्थ्य केंद्र खोले जा रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्र खुलने से ग्रामीणों को छोटी बीमारियों के इलाज के लिए दूर स्थित अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और पैसे की बचत होगी। सभी केंद्रों पर स्टाफ की तैनाती और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी।-डॉ. नरेंद्र दहिया, सिविल सर्जन, रेवाड़ी