रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में स्थित एकमात्र हाॅस्टल के 60 कमरों में 100 विद्यार्थी रह रहे हैं। आवासीय सुविधा को लेकर छात्रों को परेशानी नहीं है लेकिन हॉस्टल में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर छात्र संगठन एनएसयूआई से सवाल उठाए हैं। हॉस्टल के वाशरूम में नल टूटे हैं, शॉवर खराब पड़े हैं। गीजर के तार खुले हुए हैं जिससे खतरे की आशंका बनी रहती है।
हॉस्टल में एक कमरे में दो विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था है। हॉस्टल में वाईफाई की सुविधा सुचारु नहीं है। कुछ कमरों में इंटरनेट चलता है, जबकि कई जगह कनेक्टिविटी की समस्या बनी रहती है। इससे ऑनलाइन पढ़ाई और अन्य जरूरी कार्य प्रभावित होते हैं।
हॉस्टल के कई कमरों में मरम्मत के अभाव में पंखे धीमी गति से चलते हैं। इससे गर्मी में विद्यार्थियों को परेशानी होती है। वहीं एक मंजिल के वाशरूम में शीशे लगे हैं जिबकि दूसरी मंजिल पर शीशे की सुविधा नहीं है।
विद्यार्थियों का कहना है कि कई जगह गीजर के तार खुले हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टल की बिजली व्यवस्था और अन्य सुविधाओं की जांच कराने की मांग की है।
मेस की सुविधा को लेकर भी नाराजगी
हॉस्टल में मेस की सुविधा है। इसके बावजूद भोजन और अन्य सुविधाएं उनकी अपेक्षा के अनुरूप नहीं हैं। विश्वविद्यालय में उपलब्ध अन्य सुविधाओं की तुलना में हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है। एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से सुविधाओं के लिए शुल्क लिया जाता है तो उन्हें बेहतर और सुरक्षित व्यवस्थाएं मिलनी चाहिए। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से वाईफाई, पंखे, वाशरूम, गीजर की वायरिंग और मेस व्यवस्था की जांच कराकर कमियों को जल्द दूर करने की मांग की है।
सुरक्षित और बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की मांग
एनएसयूआई नेता रवि मसीत का कहना है कि हॉस्टल में विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं बेहतर तरीके से मिलनी चाहिए। वाईफाई, पंखे, वाशरूम में टूटे नल, खराब शावर और गीजर की खुली वायरिंग जैसी समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन को गंभीरता से लेते हुए जल्द दूर करना चाहिए। विद्यार्थियों से मेस के लिए शुल्क लिया जा रहा है, इसलिए उन्हें भोजन की उचित सुविधा भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुरक्षित और बेहतर माहौल उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
वर्जन:
हॉस्टल के 60 रूम हैं। एक रूम में 2 बच्चे रहते हैं। करीब 100 अभी बच्चे रह रहे हैं। छत की जर्जर बाउंड्री की मरम्मत का कार्य हो रहा है। गलती से मजदूरों से वाईफाई का तार टूट गया था। वाईफाई की सुविधा दुरुस्त की जाएगी। हमारी मेस की एक कमेटी है। कोआपरेटिव मेस है। इसको बच्चे ही चलाते हैं। एक माह का हमारा जितना खर्चा आता है, उतना बच्चों में बांट दिया जाता है।-डॉ. जयपाल, हॉस्टल वार्डन, आईजीयू।
वाशरूम से बह रहा पानी। संवाद
वाशरूम से बह रहा पानी। संवाद
वाशरूम से बह रहा पानी। संवाद