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Rewari News: आस्था और विरासत का प्रतीक है सेंट एंड्रयूज चर्च, इस बार 130वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी

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कानोड़ गेट पर स्थित सेंट एंड्रयूज चर्च। संवाद
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रेवाड़ी। शहर के कानोड़ गेट स्थित सेंट एंड्रयूज चर्च न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है बल्कि यह ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत का भी जीवंत उदाहरण है। वर्ष 1895 में एसपीजी मिशन के मिशनरी रेवरेंड टॉमस विलियम्स द्वारा निर्मित इस चर्च को बने 130 वर्ष पूरे हो चुके हैं। रेवरेंड टॉमस ही इस चर्च के पहले पादरी रहे।
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सेंट एंड्रयूज चर्च की इमारत गॉथिक आर्किटेक्चर शैली में निर्मित है। इस स्थापत्य कला की विशेषता ऊंची छतें, नुकीले मेहराब और भव्य संरचना होती है जो इस चर्च में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ऊंचाई और विशालता के कारण यह इमारत दूर से ही लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। गॉथिक कला का यह चर्च आज भी अपनी मूल बनावट के साथ खड़ा है।
इस ऐतिहासिक चर्च को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। खासकर क्रिसमस से एक माह पहले यहां चहल-पहल काफी बढ़ जाती है। स्कूली बच्चे भी सैकड़ों की संख्या में प्रतिदिन इस चर्च को देखने आते हैं और इसके इतिहास से रूबरू होते हैं।
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चर्च के वर्तमान पादरी गोल्ड विन ने बताया कि यह 130 वर्ष पुरानी धरोहर है। ऐसे में पुरातत्व विभाग को भी इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। इस वर्ष चर्च की 130वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी जिसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं।
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इस वजह से रेवाड़ी में बना था चर्च
पादरी गोल्ड विन बताया कि इस चर्च की खास बात यह भी है कि यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं। रेवाड़ी के अलावा गुरुग्राम, अलवर, जयपुर, दिल्ली, नारनौल, भिवानी, पटौदी और महेंद्रगढ़ सहित अन्य राज्यों से भी लोग यहां पहुंचते हैं। चर्च के समीप बने स्कूल और अस्पताल के मरीज व उनके परिजन भी यहां प्रार्थना करने आते हैं। 1857 के बाद दिल्ली में बने कई चर्चों को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद मिशनरियों ने दिल्ली से बाहर निकलकर हरियाणा में गुरुग्राम, रोहतक, करनाल और रेवाड़ी में चार गिरजाघरों का निर्माण कराया जिनमें सेंट एंड्रयूज चर्च प्रमुख है।
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