संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। इंस्पायर अवॉर्ड के तहत अबतक जिले से महज 540 विद्यार्थियों ने ऑनलाइन आइडिया भेजे हैं जबकि लक्ष्य 1250 का निर्धारित किया गया था।
इंस्पायर अवॉर्ड के तहत राजकीय व निजी विद्यालय के छठी से 10वीं कक्षा तक के विद्यार्थी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अपने आइडिया पर मॉडल तैयार करके राष्ट्रीय स्तर पर अवॉर्ड पाने के लिए आवेदन करते हैं। अब विद्यार्थियों के लिए केवल चार दिन शेष बचे हैं और जिले में आइडिया भेजने की गति बहुत धीमी चल रही है। प्रत्येक खंड से 250 आइडिया मांगे गए थे। कुल 1250 आइडिया भेजे जाने थे, लेकिन यह आंकड़ा अभी 540 पर ही आकर अटक गया है, जोकि मानक से काफी कम है।
शिक्षा विभाग ने इंस्पायर अवाॅर्ड योजना वर्ष 2013-14 में शुरू की थी। यह योजना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से चलाई जा रही है। इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को अपने आइडिया के साथ मॉडल भी तैयार करने होते हैं और छात्र द्वारा भेजा गया आइडिया व्यावहारिक, सामाजिक उपयोगिता, पर्यावरण की अनुकूलता, नवीनता और वर्तमान तकनीक से बेहतरी के आधार पर होना चाहिए।
एक विद्यार्थी ऑनलाइन तीन से पांच आइडिया भेज सकते हैं। इसके लिए छात्रों को विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। छात्र द्वारा भेजा गया आइडिया व्यवहारिकता, सामाजिक उपयोगिता, पर्यावरण की अनुकूलता, नवीनता और वर्तमान तकनीक से बेहतरी के आधार पर होना चाहिए। उसके बाद जिस विद्यार्थी का आइडिया चयनित होगा, विभाग की तरफ से आइडिया पर कार्य करते हुए मॉडल तैयार करने के लिए दस हजार रुपये का बजट जारी किया जाएगा। इससे विद्यार्थी की नवाचार के प्रति रुचि बढ़ेगी। उसके द्वारा आइडिया पर कार्य करते हुए आगे बढ़ने के अवसर भी मिलेंगे।
मेधावी छात्रों में विज्ञान की रुचि बढ़ाना उद्देश्य
इंस्पायर अवॉर्ड मानक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य मेधावी छात्रों में विज्ञान की पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना व वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए आकर्षित करना है। कार्यक्रम के तहत कक्षा छठी से दसवीं तक के मेधावी छात्र जिनके आइडिया चयनित होते हैं।
वर्जन :
इंस्पायर अवॉर्ड के तहत जिले से अभी तक कुल 540 विद्यार्थियों ने आइडिया भेजे हैं। विद्यालय मुखिया की ओर से विद्यार्थियों को आइडिया भेजने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को केवल नव प्रवर्तनों के लिए प्रेरित करना है, ताकि विद्यार्थियों की सोचने की क्षमता बढ़ सके।-रेनू यादव, जिला विज्ञान विशेषज्ञ, शिक्षा विभाग रेवाड़ी।