रेवाड़ी। मोबाइल टावर लगाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी के एक मामले में गिरफ्तार गांव रायपुर करछलिया निवासी आरोपी पंकज गुप्ता को अदालत से राहत नहीं मिली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. सुनीता ग्रोवर ने उसकी दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी।
आरोपी इससे पहले भी 6 जून को जमानत मांग चुका था जिसे अदालत ने ठुकरा दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी याचिका 25 जुलाई को रद्द कर दी थी। जमानत की मांग करते हुए आरोपी के वकील ने कहा कि पंकज गुप्ता का धोखाधड़ी से लेना-देना नहीं है। शिकायतकर्ता अदालत में बयान दे चुका है कि वह उस बैंक खाते को नहीं जानता जिसमें पैसा भेजा गया।
आरोपी 21 अप्रैल 2025 से जेल में है इसलिए उसे राहत दी जाए। सरकारी वकील ने दलील दी कि पंकज गुप्ता और साथी धीरज साइबर ठगी करने वाले गिरोह से संबंध रखते हैं। शिकायतकर्ता की पूरी राशि उसी खाते में गई जिसे पंकज ने उपलब्ध कराया था। आरोपी को राशि का कमीशन भी मिला था, जो उसके बैंक खाते में आया।
आरोपी ने लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की जिससे जांच प्रभावित हुई। इस तरह के गंभीर साइबर अपराध में आरोपी को जमानत देना जोखिम भरा होगा। दोनों पक्षों दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाया गया जुर्म गंभीर है। इसमें साइबर फ्रॉड शामिल है। इस बात की संभावना बनी हुई है कि आरोपी कानूनी कार्रवाई से भाग सकता है जिससे केस में रुकावट आ सकती है क्योंकि आरोपी इस मामले में अपनी गिरफ्तारी से बचता रहा। इसलिए मामले के तथ्यों और हालात को देखते हुए और आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आरोपी की जमानत अजीँ खारिज की जाती है।
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शिकायतकर्ता को मोबाइल टॉवर लगाने के नाम पर ठगी का आरोप:
मामला वर्ष 2021 का है। शिकायतकर्ता बलजीत सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 16 जुलाई 2021 को उसे निखिल कुमार नाम के व्यक्ति ने फोन पर एक कंपनी से होने का दावा किया और मोबाइल टॉवर लगाने की योजना बताकर पहले 1750 रुपये और बाद में 23 हजार व 19,800 रुपये की दो किस्त और जमा करा ली। कुल मिलाकर शिकायतकर्ता से 1,12,250 रुपये की ठगी हुई। यह पूरी राशि बैंक के उस खाते में जमा हुई जो पंकज गुप्ता से जुड़ा हुआ बताया गया।