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एम्स निर्माण में फंसा मुआवजे का पेंच, किसान बोले 50 लाख से एक रुपया कम भी नहीं मंजूर, डीसी बोले-दोबारा करें विचार

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रेवाड़ी। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान( एम्स) निर्माण में एक बार फिर से मुआवजे का पेंच फंसता दिख रहा है। शासन के आदेश पर मंगलवार को प्रशासन की ओर से किसानों के साथ हुई बैठक में किसानों ने 50 लाख में से एक भी रुपया कम होने पर जमीन देने से मना कर दिया है। बैठक में डीसी यशेंद्र सिंह बतौर अध्यक्ष मौजूद रहे। डीसी ने बैठक में कहा कि जिला प्रशासन व सरकार का प्रयास है कि एम्स का निर्माण जल्द से जल्द हो। इसलिए बार-बार ग्रामीणों के साथ बैठक की जा रही है ताकि इस प्रोजेक्ट को जल्द अमली जामा पहनाया जा सके। डीसी ने बताया कि सरकार के निर्देश पर यह बैठक आयोजित की जा रही है। माजरा गांव के लोगों ने डीसी को बैठक में अवगत कराया कि वे अपनी जमीन पचास लाख रुपये प्रति एकड़ से नीचे नहीं देंगे। इस पर डीसी ने कहा कि एक बार दोबारा इस पर विचार कर लें ताकि यह प्रोजेक्ट बन जाएं, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट मना कर दिया।
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केंद्रीय टीम माजरा का कर चुकी अवलोकन
बतां दे कि एक अक्तूबर को केंद्रीय टीम में शामिल भारत सरकार में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के संयुक्त सचिव सुनील शर्मा के नेतृत्व में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एम्स नई दिल्ली डीके शर्मा, निदेशक पीएमएसएस नरेंद्र कुमार ओज, सीनियर आर्किटेक्ट सीडीबी राजीव कनौजिया, एम्स राय बरेली एसई जीपी श्रीवास्तव ने एम्स निर्माण के लिए भालखी माजरा गांव की जमीन का अवलोकन किया था। उसके उपरांत केन्द्रीय टीम ने जो भी जिला प्रशासन से जानकारी मांगी थी, वह जानकारी उपलब्ध करवा दी गई है। बैठक में एसडीएम रेवाड़ी रविंद्र यादव, एसडीएम कोसली एवं डीडीपीओ कुशल कटारिया के अतिरिक्त माजरा गांव के यशु प्रधान, देशराज सरपंच, जितेंद्र यादव, रोहताश पंच, मंजीत ठेकेदार, राजबीर, विकास, ताराचंद सहित अन्य ग्रामीण भी उपस्थित रहे।
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-फोटो- 07
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