रेवाड़ी। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। अब शिक्षकों के साथ पंचायत अधिकारी फील्ड में उतरेंगे, जो घर-घर जाकर छात्रों की संख्या बढ़ाएंगे। इसमें सरपंचों का भी सहयोग लिया जाएगा। विभाग की ओर से यह अभियान 412 गांवों में चलाया जाएगा, जिसमें शिक्षकों को टारगेट मिलेगा। एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (एडीसी) की अध्यक्षता में इस अभियान का प्लान इसी माह तैयार होगा। अप्रैल से गांव-गांव जाना शुरू कर देंगे। फिलहाल आंगनबाड़ियों के 34 हजार विद्यार्थियों पर शिक्षा विभाग की नजर है, जिनके सीधे ही आंगनबाड़ी से सरकारी स्कूलों में नए सत्र में दाखिले किए जाएंगे, जिसकी तैयारी चल रही है।
दरअसल, बढ़ती टेक्नोलॉजी और कंपटीशन के दौर में अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की बजाए प्राइवेट की और आकर्षित हो रहे हैं, जिसके कारण सरकारी स्कूलों की छात्र संख्या लगातार घट रही है। इसलिए विभाग को अब छात्र बढ़ाने के लिए नई-नई योजनाएं चलानी पड़ रही है।
विभाग द्वारा पंचायत और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से को-ऑर्डिनेट कर छात्र संख्या बढ़ाने का प्लान बनाया जाएगा, जिसकी इसी महीने में मीटिंग होगी, जिसको लेकर तैयारी है। आंगनबाड़ियों में पढ़ने वाले 34 हजार विद्यार्थियों में से बालवाटिका द्वितीय पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सीधे स्कूल में दाखिला दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
बालवाटिका द्वितीय के बच्चों को सीधा बालवाटिका तृतीय में मिलेगा एडमिशन
शिक्षा विभाग की ओर से से शुरू किए जाने वाले इस अभियान में आंगनबाड़ियों का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा, क्योंकि जिले में 412 गांव है। प्रत्येक गांव तक आंगनबाड़ियों की पूरी पहुंच है और गांव के बच्चे आंगनबाड़ियों में जाते हैं। 1099 आंगनबाड़ियों में बालवाटिका प्रथम और बालवाटिका द्वितीय चलती है, जो महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आती हैं। इसके बाद बालवाटिका तृतीय चलती है, जो सरकारी स्कूल में होती है यानी शिक्षा विभाग के अंतर्गत आती हैं। अब विभाग के लिए आंगनबाड़ी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बालवाटिका द्वितीय के बच्चों को सीधा बालवाटिका तृतीय में एडमिशन दिया जाएगा। इससे सरकारी स्कूलों के दाखिलों में काफी हद तक बढ़ोतरी होगी।
वर्जन
हर साल सरकारी स्कूलों में दाखिला बढ़ाने के लिए प्रवेश उत्सव के रूप में जिलेभर में अभियान चलाया जाता है। इस बार हमने पंचायत विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को भी इस अभियान में जोड़ने का फैसला लिया है। अभियान शुरू करने से पहले योजना बनाई जाएगी।
-कपिल पुनिया, डीईओ रेवाड़ी।