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Rewari News: सांग कला को विरासत के रूप में किया ग्रहण

Mon, 06 Oct 2025 12:52 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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फोटो : 7कार्यक्रम में एक मंच पर आए गणमान्य। स्रोत : संस्था - फोटो : शहर के मेडिकल कॉलेज चौराहे के पास लगा जाम।
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रेवाड़ी। हरियाणवी सांग कला के विकास और उसके प्रचार-प्रसार में गांव जैतड़ावास निवासी प्रसिद्ध सांग सम्राट व लोक कवि मास्टर नेकीराम और उनके परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 6 अक्तूबर 1915 में प्रसिद्ध संगीताचार्य मास्टर मूलचंद व लाडो देवी के घर में जन्मे मास्टर नेकीराम ने तीन दर्जन हरियाणवी सांगों का सृजन करते हुए 60 वर्षों तक मंचन किया।
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नेकीराम ने सांग कला को विरासत के रूप में ग्रहण किया और अपने गुरु व शामधा (अलवर) स्थित बाबा गरीब नाथ मंदिर के तत्कालीन महंत महाराज गोपाल नाथ के आशीर्वाद से इसे ऐसी गति दी कि वह सांग इतिहास में एक मिसाल बन गई। हरियाणा के साथ समूचे अहीरवाल और राजस्थान के दूर दराज के क्षेत्रों में आज भी इन्हें सर्वाधिक लोकप्रिय सांग सम्राट रूप में याद किया जाता है।
मास्टर नेकीराम के पिता मास्टर मूलचंद और उनके पुत्र मास्टर राजेंद्र सिंह ने हरियाणवी लोक संस्कृति और लोक साहित्य के संरक्षण एवं संवर्द्धन में अहम भूमिका निभाते हुए उसे 100 वर्षों से भी अधिक समय तक बनाए रखा। इनके पिता के शिष्य नानकचंद भगत अपने जमाने के प्रसिद्ध सांगी लोक कवि रहे हैं। आगे चलकर नानकचंद भगतजी के शिष्य मेहरचंद लाखनौर भी एक भजनी के रूप में प्रसिद्ध हुए। आज भी मास्टर नेकीराम के घराने को दक्षिण हरियाणा का एक प्रमुख सांग घराना माना जाता है।
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वर्तमान में परंपरा को आगे बढ़ा रहे शिष्य
मास्टर नेकीराम की सांग पार्टी में इनके सभी शिष्य-कलाकार गायन व अभिनय कला में सिद्धहस्त थे। उनका सांग मंचन लगभग सात-आठ घंटे तक चलता था। उन्होंने अपने सांगों के माध्यम से मंदिर, कुआ, बावड़ी, धर्मशाला, गोशाला, स्कूल, तालाब आदि के निर्माण सहित अनेक जनहित कार्य करवाए। उन्होंने गरीब लड़कियों के विवाह व अनेक बेसहारा लोगों की मदद कर मानवता की मिसाल कायम की। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में लोगों को जागरूक किया। आजादी के बाद भी वे निरंतर उच्च सैन्य अधिकारियों के आग्रह पर विभिन्न सैनिक छावनियों में अपनी सांग प्रस्तुति से सैनिकों का उत्साह बढ़ाते रहे। 60 वर्षों तक सांग मंचन करने के बाद 10 जून 1996 को मास्टर नेकीराम का निधन हो गया। वर्तमान में लोकगायक चंद्रभान खुशपुरा के अलावा इनके शिष्य बुद्धराम, छाजूराम राजवाड़ा, सोनू नावदी, ईश्वर सिंह बाछौद इनकी सांग व लोक गायन परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
गृह जिले में किसी चौक का नामकरण किया जाए
शिष्य बुद्धराम, छाजूराम राजवाड़ा, सोनू नावदी ने बताया कि शहर के अनाज मंडी तिराहे से शाहजहांपुर की ओर जाने वाले मार्ग का नामकरण सांग सम्राट व लोक कवि मास्टर नेकीराम मार्ग करने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया है। मास्टर नेकीराम साहित्य एवं लोकनाट्य कला संरक्षण परिषद और सांग सम्राट मास्टर नेकीराम साहित्य कला मंच की मांग है कि मास्टर नेकीराम के नाम पर हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला की ओर से साहित्यिक पुरस्कार, आईजीयू मीरपुर में चेयर और उनके गृह जनपद में किसी प्रमुख चौक का नामकरण किया जाए।
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