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जिले के लोग साल में खा गए 216 करोड़ रुपये की दवा

Sat, 31 Dec 2016 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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 पश्चिमी सभ्यता की आड़ में फास्ट फूड एवं आलसी जीवन ने जिले को बीमार कर दिया है। करीब दस लाख की आबादी वाला जिला बीते वर्ष में करीब 216 करोड़ रुपये की दवाइयां खा गया। इनमें से 60 फीसदी दवा तो शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोग ही खा गए।
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आज हम सभी नव वर्ष के आगाज पर खुशियां मना रहे हैं। लेकिन एक्सरसाइज एवं व्यायाम छोड़कर हम साल दर साल बीमार होते जा रहे हैं। परिणाम यह हुआ कि हर साल बीस फीसदी बीमार लोग बढ़ रहे हैं। वहीं बीते पांच सालों में दवाइयों की खपत में भी करीब पचास फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है।

300 मेडिकल शॉप से प्रतिदिन 30 लाख रुपये की बिक्री
जिलेे भर करीब 50 मेडिकल एजेंसी एवं करीब 250 मेडिकल स्टोर हैं। यहां से प्रतिदिन करीब तीस लाख की दवाएं सेल हो रही हैं। एक अनुमान के अनुसार सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों के स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए प्रतिदिन करीब तीस लाख रुपये दवाइयों पर खर्च किए जा रहे हैं। वहीं इतने ही पैसे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाइयों पर खर्च हो रहे हें। इस हिसाब से प्रत्येक महीने 18 करोड़ एवं साल में 216 करोड़ रुपये खर्च हो गए।  यदि लोग अपने खानपान पर ध्यान देें तो इस बड़ी राशि को बच्चों की पढ़ाई एवं अन्य कार्यों में खर्च किया जा सकता है।
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मधुमेह की चपेट में है जिला
स्वास्थ्य विभाग एवं निजी एजेंसियों से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में दवाइयों की सेल में मधुमेह की दवाइयां सबसे ऊपर हैं। इसके बाद ब्लड प्रेशर, साइकेट्रिक, एसीडिटी एवं हृदय रोग संबंधी दवाइयों का नंबर आता है। नागरिक अस्पताल में बीते तीन साल में ओपीडी में आए मरीजों की बात करें तो 2014 के अगस्त महीने में 22573,  2015 में 27 हजार एवं 2016 में इसी महीने में 31 हजार मरीज उपचार के लिए नागरिक अस्पताल में पहुंचे। आंकड़ों को देखकर आसानी से पता लगाया जा सकता है कि तीन सालों में अगस्त महीने में हर वर्ष पांच हजार का अंतर पाया गया।

ऐसे करे नए वर्ष का आगाज
डॉक्टरों के अनुसार तला हुआ (फ्राइड) खाने को त्यागने मात्र से आधे से ज्यादा बीमारियों से बचा जा सकता है। ग्रामीण परिवेश में फिजिकल काम करने के कारण लोग इतना जल्दी बीमारी की चपेट में नहीं आते। लेकिन शहरी लोग बीमारियों की चपेट में जल्दी आते हैं। यदि एक सप्ताह में पांच दिन आधा-आधा घंटा भी तेजी से टहला जाए तो काफी हद तक बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। इसी के साथ प्रोटीन युक्त खाना, समय पर सोना एवं समय पर खाना भी जरूरी है। लोग एक बार में न खाकर दिन में करीब चार बार थोड़ा-थोड़ा खाना जरूरी है।

महज लाइफ स्टाइल एवं खानपान पर नियंत्रण कर बेवजह बीमारियों में होने वाले खर्च से बचा जा सकता है। जिले में ही प्रतिदिन करीब तीस लाख की दवाइयां खप जाती हैं। यदि योगा प्राणायाम एवं तला हुआ छोड़ा जाए तो बदलाव आ सकता है।
-डॉ बीके राजौरा, सीएमओ, रेवाड़ी।

हर साल करीब दस फीसदी दवाओं की मांग बढ़ रही है। बीते कुछ वर्षों में सर्वाधिक वृद्धि देखी गई है। इसमें भी मधुमेह की दवाई की मांग जिले में सर्वाधिक है।
-ओमदत्त शर्मा, संगठन मंत्री, हरियाणा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन हरियाणा

गांव में लोग कुछ समय फिजिकल काम करते हैं। इसलिए गांवों की तुलना में साठ फीसदी ज्यादा शहरी लोग बीमारियों की चपेट में आते हैं। नव वर्ष में फास्ट फूड छोड़कर प्रोटीन युक्त खाना खाकर एवं दिन में किसी भी समय कम से कम आधा घंटा तेज चलकर भी सेहत को सुधारा जा सकता है।
डॉ. रणबीर सिंह, फिजिशियन

लोगों को फिट रहने के लिए फास्ट फूड छोड़ घरेलू नुस्खों को अपनाना चाहिए। प्राणायाम एवं व्यायाम जीवन के लिए जरूरी है। यदि जीवन को दवाआें से बचाना है तो घरों से निकलकर पार्कों में जाना होगा।
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डॉ. हरिओम कुलश्रेष्ठ, आयुर्वेदिक चिकित्सक
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