रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में स्वदेशी शोध संस्थान के सहयोग से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि स्वदेशी जागरण मंच के सह-संघटक सतीश ने विद्यार्थियों को स्वदेशी सोच, आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि आज के समय में भारत को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने के लिए युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दें, स्थानीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें और अपने कौशल और ज्ञान के माध्यम से नए नवाचार विकसित करें।
उन्होंने उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता मानसिकता और सोच का भी विषय है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने अंदर आत्मविश्वास विकसित करें और चुनौतियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहें।
स्वदेशी शोध संस्थान की तरफ से एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई जिसमें विभिन्न स्वदेशी उत्पादों को रखा गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न मोटर उत्पादों को विद्यार्थियों की प्रदर्शनी के लिए रखा गया।
प्रतिस्पर्धा के लिए विद्यार्थियों को तैयार रहने का आह्वान
विशिष्ट अतिथि दीपक जैन ने उद्यमिता, नेतृत्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए विद्यार्थियों को तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का युग तेजी से बदलती वैश्विक प्रतिस्पर्धा का है जहां केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और नेतृत्व क्षमता भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक कौशलों संवाद क्षमता, समस्या समाधान और तकनीकी ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे निरंतर सीखते रहें और अपने कौशल को समय के साथ अपडेट करते रहें। कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने विद्यार्थियों व शोधार्थियों को आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं सतत भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया।
आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने पर दिया बल
विशिष्ट अतिथि रवि गुप्ता ने छात्रों को उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने यह भी जोर दिया कि युवा पीढ़ी को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट कार्य और उद्योग से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी से छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है जो उनके कॅरिअर निर्माण में सहायक होता है। अंतरराष्ट्रीय वक्ता प्रोफेसर मोहन कोल्हे ने ऑनलाइन माध्यम से बताया कि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में सोचते हुए स्थानीय स्तर पर काम करना आज की आवश्यकता है। नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास के माध्यम से विद्यार्थी न केवल कॅरिअर को नई दिशा दे सकते हैं बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।