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Rewari News: राजीव गांधी खेल स्टेडियम बदहाल, नहीं सुधर रहे हालात

Thu, 27 Nov 2025 12:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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नेहरूगढ़ स्टेडियम की बदहाल दशा। संवाद
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कोसली। बजट के अभाव में गुरावड़ा, आशियाकी पांचौर, मनेठी, कोसली और नेहरूगढ़ स्थित राजीव गांधी खेल स्टेडियम की दशा काफी समय खराब है। कहीं ट्रैक खराब है तो कहीं भवनों की खिड़कियां टूट गई हैं। मैदान में झाड़ियां उगी हैं।
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दो साल पहले खेल विभाग की ओर से 1 करोड़ 49 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। इस बजट से राजीव गांधी स्टेडियम की दशा सुधारनी थी। इनमें से किसी स्टेडियम को 48 लाख तो किसी को कम बजट की स्वीकृति दी गई। जजा स्टेडियम से कार्य का जो एस्टीमेट बनाया गया था, वही कार्य कराये जाने थे।

बजट स्वीकृत होने के बाद से पैसा धनराशि नहीं मिलने से स्टेडियम की दशा नहीं सुधारी जा सकी है। अब इनकी हालत खराब हो गई है। स्टेडियमों की खिड़कियां टूटी हैं। दरवाजे भी नहीं हैं। मैदान तक दुरुस्त नहीं है। कुछ स्टेडियम में मैदान पर झाड़ियां उग आई हैं। गुरावड़ा में ओपन जिम अब तक इंस्टॉल नहीं हो सकी है। इन मैदानों की दशा सुधरने पर खिलाड़ियों को काफी सहूलियत होगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
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इंसेट
चहारदीवारी टूटी तो कहीं पर मैदान खराब


राजीव गांधी खेल स्टेडियम मनेठी का भवन जर्जर हो गया है। खिड़कियां टूटी हैं। पानी के लिए बोरवेल नहीं है। एथलेटिक ट्रैक समतल नहीं है। परिसर में एथलेटिक ट्रैक, फुटबॉल, वालीबॉल मैदान हैं। गुरावड़ा स्टेडियम का भी भवन जर्जर है। खिड़कियां टूटी हैं। एथलेटिक ट्रैक खराब है। कमोवेश यही हाल कोसली स्टेडियम की भी है। देखरेख के अभाव में स्टेडियमों में बड़ी-बड़ी घासें उग गई हैं। आशियाकी पांचौर और धारूहेड़ा खेल परिसर में की स्थिति भी दयनीय है।
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वर्जन
बजट मिलते ही सभी स्टेडियम की मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। कोशिश यही है कि इसे जल्द पूरा कराया जाए।- ममता देवी, कार्यवाहक जिला खेल अधिकारी।
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फोटो : 44, 45



क्षेत्र में तीन स्टेडियम हैं लेकिन खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। न कोच हैं और न ही रखरखाव की व्यवस्था। ऐसे में खिलाड़ी कैसे बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि युवा खेलों में आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन मैदानों की स्थिति देखकर उनका उत्साह कम हो जाता है। राजबीर पहलवान







सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च करके स्टेडियमों का निर्माण तो कर दिया लेकिन सुविधाएं शून्य हैं। उपकरण खराब पड़े हैं। मैदान क्षतिग्रस्त हैं। देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं है। नतीजा यह है कि ये स्टेडियम खंडहर की शक्ल लेते जा रहे हैं। क्षेत्र में प्रतिभा की कोई कमी नहीं लेकिन प्लेटफॉर्म न मिलने के कारण खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रहे।- प्रेम सिंह, कबड्डी खिलाड़ी

नेहरूगढ़ स्टेडियम की बदहाल दशा। संवाद

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