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बारिश से तालाब बन गईं सड़कें

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कालका रोड पर बारिश की वजह से हुए जलभराव के बीच निकलते वाहन। - फोटो : Rewari
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पिछले पूरे माह में जितनी बारिश हुई, उसके मुकाबले बुधवार को एक दिन में बारिश हुई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अगस्त माह में जिले में 61.71 एमएम बारिश हुई जबकि के बुधवार को 86 एमएम बारिश दर्ज की गई। बारिश के चलते कालका रोड सहित अन्य बाजारों की दुकानों में पानी भर गया। वहीं, जिले में कपास व बाजरा की पकी हुई फसल की कटाई के दौरान तेज बारिश के चलते किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार पांच सितंबर तक लगातार बारिश होने का अनुमान है।
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जिला प्रशासन की ओर मानसून से पहले बारिश से होने वाले जलभराव को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे। निचले इलाके में घरों के अंदर बरसात का पानी घुसने से लोग पानी निकासी करते रहे। सड़क और नालियों में पानी भरने से सीवर भी ओवरफ्लो हुए। शहर के माडल टाउन, कंपनी बाग, हाउसिंग बोर्ड कालोनी, भाड़ावास गेट, ब्रास मार्केट, दिल्ली गेट, कानोड गेट, नाईवाली चौक, पुरानी सब्जीमंडी, नागरिक अस्पताल का मुख्यद्वार, नई आबादी, नई बस्ती, रामपुरा रोड, बस अड्डा, रेलवे रोड, नई अनाजमंडी सहित विभिन्न इलाकों में पानी जमा होने से वाहन चालकों के साथ राहगीर भी परेशान रहे। कई जगह पानी भरने से दुपहिया और चौपहिया वाहन खराब होने से लोग जूझते रहे।
पूरा दिन बनी रही जाम की स्थिति
बरसात के कारण सड़कों पर हुए जलभराव के कारण शाम तक शहर में ट्रैफिक व्यवस्था का बुरा हाल रहा। सरकुलर रोड पर घंटो जाम लगा रहा। सड़क पर जल भराव के चलते जाम भी लगा। धारूहेड़ा चुंगी पर पानी ज्यादा होने के कारण शाम तक लोग परेशान रहे। बस स्टैंड के आसपास वाहनों की लंबी कतारें रही। ट्रैफिक पुलिस पानी के बीच ही ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु करती नजर आई। बरसात के मौसम में सड़कों पर जगह-जगह बने गड्डे व खुले पड़े सीवर मेनहॉल खतरा पैदा कर रहे है। मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच बारिश की संभावना किसानों की बेचैनी बढ़ा रही है।
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जुलाई में हुई बारिश से फसलें हो गई थी बर्बाद
पिजून-जुलाई में हुई तेज बारिश के कारण काफी नुकसान हुआ था। किसानों ने मुआवजा के लिए आवेदन किया हुआ है तो कुछ किसान अभी भी आवेदन कर रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से अभी सर्वेक्षण ही चल रहा है। बता दें कि किसानों 40 हजार हेक्टेयर में बाजरे की तो 10 हजार हेक्टेयर में कपास की बिजाई की हुई है। पिछले साल लगभग 70 हजार हेक्टेयर में बाजरा तो 18 हजार हेक्टेयर में कपास की खेती हुई थी। अब एक बार फिर से पकी हुई फसल के दौरान तेज बारिश के चलते किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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