रेवाड़ी। जिले में 4 दिन की छुट्टी के बाद फिर शुरू होने वाली बाजरे की खरीद सोमवार दोपहर बाद कॉमर्शियल पर शुरू की गई। करीब 1300 किसानों को गेट पास जारी किए गए और 5 हजार क्विंटल बाजरे की खरीद की गई। हैफेड की ओर से अभी तक 20 हजार 260 एमटी बाजरे की खरीद की जा चुकी है। हालांकि उठान का कार्य बहुत धीमा है। अभी तक मंडी में 2 लाख कट्टों में से सिर्फ 1 लाख कट्टों का ही उठान हो पाया है। बताया जा रहा है कि मानकों पर खरा नहीं होने की वजह से वेयरहाउस की ओर से बाजरे का भंडारण करने से इंकार कर दिया। 23 सितंबर से रेवाड़ी में बाजरे की कॉमर्शियल खरीद हैफेड की ओर से शुरू की गई थी। 3 दिन तक लगातार रेवाड़ी और कोसली मंडी में बाजरा खरीदा गया। खरीद शुरू होते ही किसानों की भीड़ मंडी में पहुंची और मंडी में इतना बाजरा पहुंच गया कि उसे रखने की जगह ही कम पड़ गई, जिसके चलते मंडियों में खरीद बंद करनी पड़ी।
फड़ और टीन-शेड पर बाजरे के कट्टे ही कट्टे
रेवाड़ी और कोसली में खरीदे गए बाजरे का उठान काफी धीमा हो रहा है। रेवाड़ी जिले में सिर्फ 50 फीसदी बाजरे का ही उठान हो पाया है। यहीं हाल कोसली मंडी का है। यहां भी टीन-शेड और फड़ पर चारों तरफ बाजरे के भरे हुए कट्टे रखे हुए हैं। खरीद बंद करने के पीछे कारण भी यही रहा कि जल्द से जल्द उठान कर दिया जाए। इसमें भी दो बड़ी वजह सामने आईं। बाजरे में नमी और क्वालिटी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी के चलते अभी दोबारा से खरीद शुरू नहीं हो पाई है।
सुबह से गेट पास जारी किए जा रहे
खास बात यह है कि सोमवार से ही एमएसपी पर भी खरीद शुरू करने की बात सामने आ रही थी। बाजरे की खरीद को लेकर मंडी अलॉट की जा चुकी है। वेयर हाउस को रेवाड़ी व कोसली मंडी अलॉट हुई है। मंडी खुले होने के कारण सोमवार सुबह से ही किसानों को गेट पास जारी किए गए।
जिले की मंडियों में नहीं होगा बाजरा खरीद का कार्य
हैफेड मुख्यालय के निर्देशानुसार जिला की मंडियों में उठान प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए किसान हित में मंगलवार 3 अक्तूबर को मंडियों में बाजरे की फसल खरीद का कार्य नहीं किया जाएगा और न ही गेट पास जारी किए जाएंगे। हैफेड के डीएम संत राम ने जानकारी देते हुए किसानों से आह्वान किया कि वह 3 अक्तूबर को जिले की मंडियों में अपनी बाजरे की फसल बिक्री के लिए न लाएं। डीएम ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में जिला की मंडियों में बाजरे की फसल की अप्रत्याशित अधिकता देखी गई है। उपज के उठान और भंडारण में किसी प्रकार की परेशानी न आए इसके लिए किसान हित में यह निर्णय लिया गया है।