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Rewari News: एग्री रिसर्च सेंटर में बायो कंट्रोल लैब स्थापित करने के लिए भेजा प्रस्ताव

Sun, 26 Feb 2023 11:58 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। जिले के किसान जैविक खेती की तरफ कदम बढ़ने लगे हैं। वर्तमान में 100 से ज्यादा किसान 500 एकड़ में जैविक खेती कर रहे हैं और यह दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में जैविक खेती को अब आधुनिक बनाने के लिए बावल स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र भी तैयारी में जुट गया है। सेंटर में बायो फर्टिलाइजर लैब के बाद बायो कंट्रोल लैब स्थापित करने की तैयारी चल रही है। इस लैब बनने पर जैविक तरीके से कीटों का प्रबंधन हो सकेगा।
इसी तरह हाइटेक नर्सरी भी खोलने की प्रक्रिया पर भी काम हो रहा है। अन्य कई योजनाओं की भी प्लानिंग तैयार की गई है। इन प्रोजेक्ट को लेकर क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल की ओर से चौ. चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के माध्यम से मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सकती है।
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लैब स्थापित होने के ये होंगे प्रभाव :
बायो कंट्रोल लैब:
जैविक खेती के लिए इस लैब में दीमक, उखेड़ा रोग व फफूंदी रोग के नियंत्रण के लिए जीवाणुओं का उत्पादन किया जाएगा। इन जीवाणुओं में ट्राइकोडरमा, मेटारिजियम व बवेरिया आदि शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर ही लेब में ये जीवाणु तैयार होने से जैविक खेती करने वाले किसानों को सस्ते दामों पर मिल जाएंगे। इसमें खास रहेगा कि जैविक खेती करने के लिए किसानों के सामने जो दिक्कतें आएंगी, उनका भी समाधान होगा। जैविक खेती के लिए किसानों को इस लैब से बड़ी सहायता मिलेगी।

हाइटेक नर्सरी: हॉट्रीकल्चर (फलदार) पौधों के लिए भी हाइटेक नर्सरी बनाने की तैयारी चल रही है। इसमें शेड नेट और पॉली हाउस बनेगा। जिसमें पौधे संरक्षित रहेंगे। सर्दी, गर्मी और बरसात में भी पौधे बेहतर बनेंगे। पौधों में फुटाव अच्छा रहेगा। इसमें पानी भी ड्रिप, माइक्रो सूक्ष्म तरीके से होगा। इस पर 25 लाख रुपये खर्च होंगे।

नेचुरल फार्मिंग:
प्राकृतिक खेती को वैज्ञानिक आधार पर करने के लिए गाय के यूरिन और गोबर से तैयार की जाने वाली दवाइयों पर भी रिसर्च होगा। इसके रिसर्च के लिए भी प्रोजेक्ट भेजा हुआ है। स्वीकृति मिलती है तो प्राकृतिक खेती को करने में आने वाली समस्याएं भी दूर हो सकती है। किसानों को रिसर्च की गई दवाइयों को तैयार करने के लिए ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इस प्रशिक्षण के उपरांत किसान वैज्ञानिक आधार पर प्राकृतिक खेती कर सकेंगे और अच्छा मुनाफा ले पाएंगे।

खजूर के पौधों पर रिसर्च:
मार्च माह में खजूर के 20 पौधे मंगाए जाएंगे। जिन पर रिसर्च किया जाएगा। इसमें देखा जाएगा कि जिले में खजूर के पौधों को उगाने के लिए जलवायु उपयुक्त है या नहीं। अगर उपयुक्त है तो निकट भविष्य में किसानों को उगाने के लिए भी उपलब्ध करवाए जाएंगे।

जीरो टिलेज:
जिले में जीरो टिलेज (शून्य जुताई) तकनीक से बिजाई होती है, लेकिन अभी कम है। भविष्य में इसे और विस्तार देने के लिए तैयारी चल रही है। इस तकनीक से पिछले दिनों मूंग व गेहूं की बिजाई हुई थी। अब इसमें और विस्तार देने की तैयारी है। इस तकनीक से बिजाई में खर्चा कम आता है। इसी तरह बेड प्लॉटिंग बिजाई की भी तैयारी है।
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प्राकृतिक खेती के लिए दवाइयों पर रिसर्च हो सकेगा
बायो कंट्रोल लैब के लिए निदेशालय को एक करोड़ रुपये का प्रपोजल बनाकर भेजा गया है। फसलों के रोगों पर नियंत्रण के लिए सस्ते दाम पर उत्पाद मिल सकेंगे। इसी तरह प्राकृतिक खेती के लिए दवाइयों पर रिसर्च हो सकेगा। किसानों को भी ट्रेनिंग मिलेगी। इन प्रोजेक्ट को मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। अगर ये प्रोजेक्ट मिलते हैं तो बीएससी एग्रीकल्चर कर रहे विद्यार्थी रिसर्च कर सकेंगे।
- डॉ. धर्मबीर यादव, डायरेक्टर, रीजनल एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर
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