सुबह से लेकर शाम तक पूरा दिन आसमान में छाये स्मॉग व 15 दिन के अंदर तीसरी बार वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार जाने से लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। शनिवार शाम चार बजे भी धारूहेड़ा में एक बार फिर से एक्यूआई 474 दर्ज किया गया, जो देश में प्रदूषित शहरों की प्रथम श्रेणी में सुमार है। इसके चलते ही अस्पतालों में सांसों से जुड़ी बीमारी के मरीज दोगुना हो गये हैं। चिकित्सकों की माने तो इससे पहले 60-70 सांस के मरीज आ रहे थे, अब इनकी संख्या 130-150 तक पहुंच रही है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने पटाखों पर प्रतिबंध लगाकर लोगों पर प्रदूषण कम करने की जिम्मेदारी डाल दी है, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर उड़ रही धूल व सार्वजनिक स्थानों पर जलाया जा रहा कचरा सांसों में जहर घोल रहा है। इससे पहले 24 अक्तूबर को 416 व 5 नवंबर को एक्यूआई 449 दर्ज किया गया था।
बिना ढके कचरा ले जा रही नप की गाड़ियां
एक ओर प्रशासन की ओर से लगातार प्रदूषण स्तर कम करने के लिए हिदायतें जारी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विभाग ही हवा में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। बीएमजी मॉल के समीप स्थित डंपिंग यार्ड से कचरा करीब 10 किमी. दूर दिल्ली-जयपुर स्थित हाईवे पर रामसिंहपुरा में डाला जाता है। कचरे को बिना ढके ही ले जाया रहा है। कचरा रास्ते में बिखरता हुआ जाता है, इसके साथ कचरे से निकलती हुई दुर्गंध से सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में प्रशासन को सबसे पहले अपने अधिकारियों व कर्मचारियों को जागरूक करने की जरूरत है।
कंटेनर डिपो के पास कचरा जलने से धुआं-धुआं हुआ शहर
शनिवार को जिला सचिवालय के पीछे कचरे के ढेर में लगी आग से शहर में धुआं-धुआं हो गया। इस दौरान सांस लेना तक मुश्किल हो रहा था। इसके अलावा शाम के समय बस स्टैंड के पास, सब्जी मंडी, शहर के हनुमान मंदिर के पास सर्कुलर रोड पर व अन्य स्थानों पर भी कचरा जलता देखा गया। इतना ही नहीं कई बार सरकारी कार्यालयों तक में कर्मचारी कचरा जला देते हैं। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।
बढ़ते प्रदूषण से नागरिक अस्पताल में आंख में जलन, सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। कोरोना मरीजों पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है। प्रदूषण बढ़ने से आक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। सभी को मिलकर प्रदूषण स्तर कम करने पर काम करने की जरूरत है।
- डॉ. रणबीर सिंह, वरिष्ठ चिकित्सक, नागरिक अस्पताल