चिल्हड़ के विवेकानंद विद्या मंदिर में आयोजित हॉस्य काव्य सम्मेलन पर मंचासीन कवि।
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रेवाड़ी। स्वामी विवेकानंद एजुकेशन सोसायटी चिल्हड़ ने वैशाखी पर्व पर बुधवार को आयोजित हॉस्य कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सामाजिक चेतना जगाने का काम किया। कार्यक्रम में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी धर्मबीर बल्डोदिया ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि कवि समाज का आईना होता है जो अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को नई राह दिखाने का काम करता है। इस दौरान
कार्यक्रम अध्यक्ष आचार्य योगेंद्र ब्रह्मचारी ने स्कूल प्रबंधन की शिक्षा के साथ साहित्यिक आयोजन कराने के लिए सराहना की। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों की समय-समय पर ऐसे आयोजनों की आवश्यकता जताई। ताकि इनसे नई पीढ़ी प्रेरणा ले सके। हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला के सहयोग से विवेकानंद विद्या मंदिर में आयोजित इस कवि सम्मेलन में हॉस्य कवि महेंद्र शर्मा ने ‘सदा धैर्य अपनाएं न थके कभी संघर्ष में, सद्भावों के फूल खिलाएं’, दिल्ली से आए कवि सत्यदेव हरियाणवी ने अपनी कविता ‘भाइयों जिंदगी, अब तो बेहाल हो गई है, उत्तर नहीं जिसका वो सवाल हो गई’ से तालियां बटोरी। कवि हलचल हरियाणवी ने ‘खाल लटक गई पिचक गए गाल, बुढ़ापा बैरी घणा से’ कविता से रंग जमाया। हॉस्य कवि आलोक भांडोरिया ने ‘देशहित में दे गए जो अपने जिस्म की कुर्बानी, पन्ने-पन्ने पर अंकित रहेगी उनकी अमर कहानी’ कविता से वीररस का रंग बरसाते शहीदों को नमन किया। हॉस्य कवि राजेश भुलक्कड़, मनोज कौशिक तथा सत्यप्रकाश गुप्ता ने भी अपनी कविताओं से खूब वाह-वाही लूटी।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि कवि सत्यप्रकाश गुप्ता की नव प्रकाशित कृति रिश्तों की डोर का विमोचन भी हुआ। मंच संचालन हॉस्य कवि एवं साहित्यकार आलोक भांडोरिया ने किया। प्राचार्य दिनेश कुमार यादव ने सबका आभार जताया। सम्मेलन में महाबीर सिंह, मनफूल सिंह, किशन चंद, रत्नदेव शास्त्री स्कूल की चेयरपर्सन शकुंतला, प्रोमिला, सुनीता समेत अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए।