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Rewari News: आवागमन की कमी से जूझ रहे लोग, पर्याप्त रोडवेज सेवा की मांग तेज

Tue, 02 Jun 2026 07:15 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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करतार सिंह
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जगदीश यादव
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कोसली। कोसली-कनीना और कोसली-बहु-चरखी दादरी मार्ग पर राज्य परिवहन की बस सीमित होने के कारण क्षेत्र के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिन मार्गों पर कुछ वर्ष पहले तक पर्याप्त संख्या में रोडवेज बसें संचालित होती थीं वहां अब केवल नाममात्र की बसें रह गई हैं। इसका सबसे अधिक असर नौकरीपेशा, विद्यार्थियों और महिलाओं पर पड़ रहा है।
लोगों के अनुसार वर्तमान में कोसली-कनीना मार्ग पर सुबह और शाम केवल दो रोडवेज बसें संचालित हो रही हैं जबकि इस रूट पर प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आवागमन होता है। परिवहन विभाग से कई बार बसों की संख्या बढ़ाने की मांग की जा चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का मानना है कि इस मार्ग पर कम से कम छह बसों का नियमित संचालन होना चाहिए।
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बसों की कमी का फायदा निजी वाहन संचालक उठा रहे हैं। कोसली-कनीना और कोसली-बहु-चरखी दादरी मार्ग पर बड़ी संख्या में टेंपो, पिकअप और अन्य निजी वाहन यात्रियों को ढो रहे हैं। आरोप है कि इनमें से कई वाहन बिना आवश्यक परमिट और परिवहन दस्तावेजों के संचालित हो रहे हैं।
निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने के कारण यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में रहती है। सामाजिक संगठन एकता मंच ने परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर दोनों मार्गों पर पर्याप्त बसों के संचालन की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सबसे अधिक दिक्कत छात्राओं, महिलाओं और बुजुर्गों को होती है। कई विद्यार्थियों के पास रोडवेज बस पास होने के बावजूद बस उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी वाहनों में किराया देकर यात्रा करनी पड़ती है। कई बार यात्रियों को वाहनों में खड़े होकर या दरवाजों पर लटककर सफर करना पड़ता है। पर्याप्त सवारी नहीं मिलने पर निजी वाहन चालक यात्रियों को बीच रास्ते में उतार देते हैं, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है।
कोसली, नाहड़, झाल, जुड़ी, सुधारना, गुजरवास, लूखी, कारोली, बिसोवा, भड़ंगी, मुमताजपुर, खुर्शेदनगर, झोलरी सहित करीब 20 गांवों के लोग उपमंडल मुख्यालय कोसली तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन सुविधा से वंचित हैं।
इंसेट
वर्षों से बनी है समस्या

कोसली-दादरी-बहु मार्ग पर यह समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। वहीं कोसली-कनीना मार्ग पर भी तीन वर्षों में बसों की संख्या लगातार कम हुई है। पहले इस मार्ग पर कनीना, रोहतक, झज्जर और नारनौल डिपो की बसें संचालित होती थीं। इसके अलावा सहकारी समिति की चार बसें भी चलती थीं लेकिन धीरे-धीरे सभी सेवा बंद होती चली गई। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ा है।
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-ग्रामीण बोले-

करतार सिंह ने कहा कि कुछ वर्ष पहले इस मार्ग पर दर्जनों बसें चलती थीं जिन्हें धीरे-धीरे बंद कर दिया गया। उन्होंने सरकार से पूर्व की तरह बस सेवाएं बहाल करने की मांग की।

आनंद सिंह का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी परिवहन सुविधाओं का अभाव है। विभाग लंबी दूरी के रूटों पर तो ध्यान दे रहा है लेकिन गांवों को जोड़ने वाले मार्गों की अनदेखी की जा रही है।
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राकेश ने कहा कि लंबे रूटों पर बसें चल रही हैं लेकिन छोटे और ग्रामीण रूटों की उपेक्षा के कारण लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

रमेश कुमार ने मांग की है कि परिवहन विभाग ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों की जरूरतों को समझते हुए कम से कम पहले संचालित होने वाली बसों को दोबारा शुरू करे।
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वर्जन
कोसली-कनीना मार्ग पर दो बसें संचालित की जा चुकी हैं। इसके अलावा कोसली-दादरी मार्ग पर बहु तक सुबह एक बस चलाई जा रही है। दिन के समय भी अतिरिक्त बस सेवा शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।-निरंजन शर्मा, महाप्रबंधक, रेवाड़ी रोडवेज

करतार सिंह

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