रेवाड़ी। वेस्टर्न डेडिकेटिड रेल फ्रेट कॉरिडोर पर बनाया गया 111.5 मीटर लंबा स्टील ओवरब्रिज 1 दिसंबर यानि आज से यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। इससे शहर के बाहर से तीन नेशनल हाईवे की सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। दिल्ली से नारनौल और महेंद्रगढ़ के बीच भारी वाहनों का सफर 8 किलोमीटर तक कम हो जाएगा।
इससे उनके समय में 20 मिनट से एक घंटे तक की बचत हो सकेगी। यह ओवरब्रिज पूरे एशिया के प्रमुख स्टील ओवरब्रिज में से एक है, जिसका एक हिस्सा आज से खुलेगा। शहर से ट्रैफिक दबाव कम होने के बाद सरकुलर रोड पर लगने वाले जाम की समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा।
निमार्णाधीन आउटर बाईपास पर बन रहा आरओबी
शहर से ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए तत्कालीन सीएम मनोहरलाल ने नारनौल रोड से दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे को जोड़ने के लिए आउटर बाईपास की घोषणा वर्ष 2015 में की थी। सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2018 में नारनौल रोड से नेशनल हाइवे तक 18 गांवों के 1274 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। 800 से करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाले आउटर बाईपास रोड का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। बावल रोड से बाम्बड़ गांव तक इसे रोहतक और दिल्ली हाईवे से कनेक्टिविटी भी दी जा चुकी है, परंतु डालियाकी के पास न्यू रेवाड़ी रेलवे स्टेशन के निकट बन रहा रेलवे ओवरब्रिज गले की फांस बना हुआ है। पूरे आउटर बाईपास को जुलाई 2013 में ही शुरू करने की समय सीमा निर्धारित की गई थी, परंतु आरओबी के निर्माण में देरी से अभी तक यह शुरू नहीं हो सका है। 14.3 किलोमीटर लंबाई वाले इस बाईपास को बावल रोड से रोहतक हाईवे तक को कई माह पूर्व शुरू कर दिया गया था, परंतु बावल रोड से नारनौल रोड तक कनेक्टिविटी अभी तक नहीं हो सकी है। इस रोड पर फोरलेन का रेलवे ओवरब्रिज बनकर लगभग तैयार हो गया है, लेकिन उसे यातायात के लिए खोलने में लगातार देरी हो रही है।
दूसरा हिस्सा भी जल्द होगा हैंडओवर
इस बाईपास पर 111.5 मीटर लंबाई का फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज बन रहा है। यह ओवरब्रिज देश का दूसरा सबसे लंबा व सबसे वजनदार आरओबी है, जो दो-दो पिलरों पर टिका हुआ है। इसे स्पॉटलैस आरओबी कहा जाता है। आरओबी का निर्माणकार्य एचजी इंफ्रा करा रही है। दो लेन के एक हिस्से को कंपनी ने एनएचएआई को करीब तीन माह पहले ही हैंडओवर कर दिया था, जबकि दूसरा हिस्सा बनने के बाद कभी हैंडओवर किया जा सकता है।
पुल के बीयरिंग में खराबी ने बढ़ाई देरी
एनएचएआई की ओर से लोड टेस्टिंग के बाद बाईपास के दाएं हिस्से को आवागमन के लिए खोल दिया गया था। चंद घंटों बाद ही बीयरिंग में आई तकनीकी खराबी के कारण इसे दोनों ओर से एक बार फिर से बंद कर दिया गया। नारनौल रोड व ठोठवाल गांव के पास रोड के एक हिस्से को बंद किया हुआ है। दिल्ली व रोहतक की ओर से इस बाईपास से आने वाले वाहन चालकों को आरओबी से पहले ही उतरकर गांवों के रास्ते नारनौल रोड तक पहुंचना पड़ता है।
शहर पर कम हो जाएगा यातायात का दबाव
आउटर बाईपास का निर्माण नारनौल और महेंद्रगढ़ से दिल्ली व जयपुर की ओर आवागमन करने वाले भारी वाहनों के लिए कराया गया है। इससे यह वाहन शहर में प्रवेश करने की बजाय बाहर से ही निकल सकेंगे। भारी वाहनों को अभी शहर के सरकुलर रोड से ही निकलना पड़ रहा है, जिस कारण दिनभर सरकुलर रोड पर वाहनों का दबाव रहता है। रात के समय तेज रफ्तार डंपर हादसों को अंजाम देने का कारण साबित हो रहे हैं।
टेस्टिंग में पूरी तरह फिट पाया बायां हिस्सा
आरओबी के बाईं ओर के हिस्से में तकनीकी खराबी को दूर करने के बाद एनएचएआई की ओर से टेस्टिंग का कार्य पूरा करा दिया गया है। टेस्टिंग में एक हिस्सा पूरी तरह फिट पाया गया है, जिसे अब 1 दिसंबर को खोल दिया जाएगा। दूसरा हिस्सा भी बनकर लगभग तैयार है, जिसे निर्माण करने वाली कंपनी जल्द एनएचएआई के सुपुर्द कर देगी। उसे जनवरी माह में यातायात के लिए खोले जाने की संभावना है, जिससे शहर के लोगों को काफी राहत मिल सकेगी।
वर्जन
आउटर बाईपास पर बन रहे ओवरब्रिज का टीम ने सेफ्टी ऑडिट किया है। आज से इसे खोल दिया जाएगा।
-योगेश तिलक, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई