फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rewari News: करंट से युवक की मौत मामले में बिजली निगम को 23.80 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

Sat, 04 Jan 2025 11:34 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
विज्ञापन
फोटो : 02जिला उपभोक्ता आयोग रेवाड़ी। संवाद - फोटो : परिजन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


रेवाड़ी। हाईटेंशन तार की चपेट में आने से युवक की मौत मामले में जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा व सदस्य राजेंद्र प्रसाद ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को दोषी करार दिया है। आयोग ने बिजली निगम को मृत युवक के माता-पिता को 23 लाख 80 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसले में स्पष्ट किया है कि सबूत के आधार पर यह साबित होता है कि बिजली निगम ने घोर लापरवाही की है। आबादी वाले क्षेत्र में हाई टेंशन तार बिछाया गया है। आयोग ने हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए युवक की मौत के लिए बिजली निगम को दोषी करार दिया है। साथ ही बिजली निगम को 23 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान 9 प्रतिशत ब्याज के साथ मृतक के परिजनों को करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन


जिले के गांव देहलवास निवासी दंपती संतोष व कैलाश का 18 वर्षीय पुत्र लोकेश 8 अगस्त 2023 को सुबह साढ़े 7 बजे पड़ोसी रमेश की छत पर गया था। उस दौरान पास से गुजर रही 11 हजार वोल्टेज की लाइन की चपेट में आने से लोकेश की मृत्यु हो गई थी। इसकी शिकायत बिजली निगम के साथ पुलिस से भी की गई थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था। हादसे के बाद लोकेश का पोस्टमार्टम सिविल अस्पताल कराया गया था।

पुत्र की मौत से आहत दंपती ने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली। 8 सितंबर 2023 को जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर कर क्षतिपूर्ति की मांग की थी। शिकायत में दंपती ने आरोप लगाया था कि बिजली निगम ने नियमों की अनदेखी करते हुए आबादी क्षेत्र में 11 हजार वोल्टेज की हाईटेंशन की लाइन बिछाई हुई है। यहां काफी लोगों के मकान बने हैं। 8 अगस्त 2023 को साढ़े 7 बजे उनका बेटा पड़ोसी के घर की छत पर किसी काम से गया था। उसी बीच हाई वोल्टेज की करंट के चपेट में आने से उसकी मृत्यु हो गई थी।
विज्ञापन


बिजली निगम की लापरवाही हुई साबित : आयोग

जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि जो सबूत आयोग में प्रस्तुत किए गए हैं, उसके अनुसार बालकनी से 2 फुट की दूरी पर एचटी तार गुजरा है जो कि निगम की घोर लापरवाही है। सुनवाई के दौरान बिजली निगम ने इसे फेटल एक्सीडेंट 1977 के नियम से अवरुद्ध बताते हुए मुआवजा देने से मना किया था। इतना ही नहीं निगम की ओर से इलेक्ट्रिक इंस्पेक्टर की ओर से जांच भी की गई थी, जिसमें शिकायतकर्ता के पुत्र को ही लापरवाही के लिए जिम्मेदार करार देते हुए क्लेम देने से मना किया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें