रेवाड़ी। जिले की अनाज मंडियों में वीरवार को बाजरे की 10,580 क्विंटल आवक हुई, जबकि 363 किसानों के गेट पास काटे गए। बाजरे की खरीद भावांतर भरपाई योजना के तहत आढ़तियों के माध्यम से की जा रही है। मंडी में बाजरे की अधिकतम बोली 2400 रुपये प्रति क्विंटल रही, न्यूनतम बोली 2150 रुपये प्रति क्विंटल तक गई।
रेवाड़ी अनाज मंडी में 141 गेट पास कटे, जबकि 3810 क्विंटल आवक हुई है। कोसली अनाज मंडी में 222 गेट पास कटे, आवक 6760 क्विंटल हुई है।
भावांतर भरपाई योजना के तहत किसानों को बाजार भाव और निर्धारित राशि के बीच के अंतर की भरपाई सरकार की ओर से की जाएगी। सरकार की ओर से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक भावांतर भरपाई निर्धारित की गई है।
अनाज मंडियों में बाजरे की खरीद शुरू होने के पहले दिन उन किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा, जिनकी जमीन का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर सत्यापन नहीं हो पाया है।
रेवाड़ी अनाज मंडी में ऐसे कई किसान सुबह ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंचे, लेकिन भूमि सत्यापन नहीं होने के कारण उनकी फसल की खरीद नहीं हो सकी। किसान सुबह से दोपहर तक मंडी गेट के पास खड़े रहे। प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने पर कई किसानों को आखिरकार बिना फसल बेचे ही घर लौटना पड़ा। वहीं, पोर्टल में भी कुछ तकनीकी गड़बड़ी आई, मगर कुछ समय बाद वो ठीक हो गई।
मंडी प्रशासन की ओर से किसानों को स्पष्ट किया गया कि पोर्टल पर भूमि का सत्यापन होने के बाद ही फसल की खरीद की जाएगी। किसानों को यह भी बताया गया कि यदि उनकी भूमि का सत्यापन अभी तक नहीं हुआ है तो वे आवश्यक दस्तावेज पूरे कर एसडीएम के माध्यम से भूमि का सत्यापन करवा सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मंडी में किसानों की संख्या बढ़ेगी।
मंडी में दिक्कतों का सामना करना पड़ा
मंडी में फसल लेकर पहुंचे कई किसानों को भी अलग कारण से परेशानी हुई। जिन किसानों की भूमि सत्यापन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन उनके ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी, उन्हें भी मंडी में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। किसानों का कहना था कि फसल बेचने के लिए मंडी पहुंचने से पहले उन्हें पोर्टल सत्यापन और वाहनों से जुड़े नियमों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि मंडी में पहुंचने के बाद उन्हें वापस न लौटना पड़े।
भूमि सत्यापन की प्रगति 76.4 प्रतिशत:
भूमि सत्यापन पूरा नहीं होने की स्थिति में किसानों को अपनी फसल की बिक्री और योजना का लाभ लेने में दिक्कत आ रही है। आंकड़ों के अनुसार कुल 73,915 एकड़ क्षेत्र में से 56,449 एकड़ भूमि का सत्यापन पूरा हो चुका है। वहीं, 17,466 एकड़ क्षेत्र का सत्यापन अभी लंबित है। इस तरह जिले में भूमि सत्यापन की प्रगति 76.4 प्रतिशत है। शेष क्षेत्र का सत्यापन जल्द पूरा होने से बाजरे की बिक्री प्रक्रिया सुचारु हो सकेगी और पात्र किसानों को भावांतर भरपाई योजना का लाभ लेने में आसानी होगी।
दोपहर तक इंतजार करने के बाद खाली वापस लौटे
किसान सुरेश कुमार ने बताया कि सुबह ट्रैक्टर लेकर मंडी पहुंचे थे। काफी देर तक गेट पर खड़े रहे, लेकिन भूमि सत्यापन नहीं होने के कारण फसल की खरीद नहीं हो सकी। दोपहर तक इंतजार करने के बाद खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। किसान राजेश यादव ने बताया कि मेरी जमीन का सत्यापन पोर्टल पर पूरा नहीं हुआ है। मंडी में आने के बाद पता चला कि सत्यापन के बिना बाजरा नहीं खरीदा जाएगा। अब एसडीएम के माध्यम से सत्यापन कराने की बात कही जा रही है। किसान अनिल कुमार ने बताया कि भूमि का सत्यापन पूरा होने के बावजूद ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट नहीं होने की वजह से परेशानी हुई।
वर्जन:
बाजरे की खरीद भावांतर भरपाई योजना के तहत आढ़तियों के माध्यम से की गई है। अनाज मंडियों में बाजरे की खरीद शुरू होने के पहले दिन उन किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा है, जिनकी जमीन का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर सत्यापन नहीं हो पाया है।-नरेंद्र कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी
अनाज मंडी के गेट के बाहर बिना भूमि सत्यापन वाले किसान ट्रैक्टर लेकर खड़े । संवाद
अनाज मंडी के गेट के बाहर बिना भूमि सत्यापन वाले किसान ट्रैक्टर लेकर खड़े । संवाद
अनाज मंडी के गेट के बाहर बिना भूमि सत्यापन वाले किसान ट्रैक्टर लेकर खड़े । संवाद