रेवाड़ी। जिले में शिवरात्रि धूमधाम से मनाई गई। देर रात से शिवालयों में कांवड़ लाने वाले श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। बम-बम भोले के जयकारों के बीच बुधवार को दिनभर मंदिरों में पूजा अर्चना का माहौल रहा। भक्तों ने शिवलिंग पर बेल पत्र, गंगाजल आदि चढ़ाकर सुख समृद्धि की कामना की।
जगह-जगह भंडारा लगाया गया जहां कांवड़ियों और आम श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। शिवरात्रि को लेकर शिवालयों की साज-सज्जा के साथ जलाभिषेक के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए हुए थे।
शहर में इन मंदिरों में थी विशेष व्यवस्था
कांवड़ियों और पूजा अर्चना करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शहर के प्रमुख शिवालयों मोती चौक स्थित घंटेश्वर महादेव मंदिर, बारह पत्थर स्थित महादेव मंदिर, नई अनाज मंडी स्थित श्रीशिव मंदिर, सेक्टर एक स्थित सोलाराही भूतेश्वर महादेव मंदिर, लियो चौक स्थित पंचमुखी महादेव मंदिरों में पूजा अर्चना की विशेष व्यवस्था की हुई थी। बारा पत्थर स्थित महादेव मंदिर में सुबह से ही पुलिस का अमला व्यवस्था बनाने में जुटा हुआ था। इसी परिसर में चल रहे 21 दिवसीय श्रीशिव महापुराण कथा में भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। कथा वाचक गिरिश अग्रवाल ने भगवान शिव की महिमा और भोले शंकर के प्रिय माह सावन के बारे में बताया। संगीतमयी भजनों के बीच श्रद्धालुओं को झूमने को मजबूर कर दिया।
प्रभु भक्ति व देशभक्ति का जज्बा साथ-साथ
विभिन्न मंदिरों में देर शाम से ही हरिद्वार से कांवड़ लेकर आने वालों का सिलसिला शुरू हो गया था। कांवड़ लेकर आए भक्तों के स्वागत के लिए उनके परिजन भी जगह-जगह खड़े थे। इस बार प्रभु भक्ति के साथ ही कांवड़ियों ने देशभक्ति भी दिखाई। डाक कांवड़ लाने वाले अधिकांश कांवड़ियों ने अपने वाहन पर तिरंगा भी लगाया हुआ था। देशभक्ति के गीत भी खूब बजाए गए।
धारूहेड़ा क्षेत्र में हुए दिनभर कार्यक्रम
शिवरात्रि पर कस्बे के मुख्य बाजार स्थित शिव मंदिर, संतोष काॅलोनी स्थित शिव मंदिर, सेक्टर छह, चार व ग्रामीण इलाकों में शिवरात्रि पर शिव भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिरों में रात को शिव जागरण और शुक्रवार को भंडारों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। दिनभर मंदिरों में रौनक बनी रही। शिवरात्रि को लेकर रात को मंदिरों को सजाया गया था।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी हुए कार्यक्रम
शहर के साथ साथ कोसली, बावल, कुंड, डहीना, जाटूसाना सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना आरंभ हुआ जो देर शाम तक जारी रहा।