रेवाड़ी। टोक्यो पैरालंपिक में भारतीय दल के ध्वजवाहक बने टेकचंद ने भारत लौटने के बाद अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने का फैसला लिया है। वह खेलों की तरह शिक्षा जगत में भी अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं।
रेवाड़ी जिले के बावल कस्बे के निवासी टेकचंद इरादे के बिल्कुल पक्के हैं। वह एक बार जो ठान लेते हैं, उसे पूरी मेहनत के साथ पूरा करते हैं। पैरालंपिक से पहले टेकचंद ने खेल जगत में काफी उपलब्धियां हासिल की हैं और अपनी अलग की पहचान बनाई हैं। पैरालंपिक के बाद उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया है। टेकचंद ने 12वीं कक्षा के बाद आईटीआई तक पढ़ाई की है। उन्होंने आगे यूजी कोर्स में दाखिला भी लिया था, लेकिन निजी कारणों के चलते वह आगे की पढ़ाई नहीं कर पाए। उन्होंने इसके बाद वर्ष 2002 में एक निजी कंपनी में काम करना शुरू किया था। वर्ष 2004 में राजस्थान के भिवाड़ी स्थित एक कंपनी से लौटते समय वह दुर्घटना के शिकार हो गए थे। इसके बाद उनको सात साल तक बिस्तर पर रहना पड़ा। जीवन के संघर्षों के आगे वह अपनी आगे की पढ़ाई को बिल्कुल भूल गए। वर्ष 2016 में टेकचंद ने पैरालंपिक को अपना सपना बनाया और दिन- रात दिन मेहनत करने लगे। आखिरकार दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में 29 जून को आयोजित ट्रायल के एफ-54 वर्ग के ज्वैलिन थ्रो में क्वालीफाई करने पर टेकचंद को पैरालंपिक टोक्यो का टिकट मिला। अभी उन्होंने पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। टेकचंद ने बताया कि अब पैरालंपिक से लौटने के बाद वह फिर यूजी कोर्स में दाखिला लेंगे।