संवाद न्यूज एजेंसी
धारूहेड़ा। गांव खरखड़ा में वर्षों से उपेक्षित पड़े जोहड़ के जीर्णोद्धार का रास्ता अब साफ हो गया है। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव की ओर से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में याचिका की थी। एनजीटी के फैसले के बाद हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण ने जोहड़ का जीर्णोद्धार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रशासन ने इसे गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा मानते हुए एक विशेष एजेंसी को टेंडर जारी कर दिया है और अब तय समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। हरियाणा तालाब प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार इस जोहड़ का पुनर्निर्माण कार्य जुलाई 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। पहले चरण में जोहड़ में जमा गंदगी और ठोस कचरे को हटाया जाएगा। इसके बाद तालाब की गहराई बढ़ाने और किनारों को मजबूत करने का कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही जल संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए तालाब के तल में विशेष परत डाली जाएगी ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन किया जा सके। पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से तालाब के चारों ओर पौधारोपण किया जाएगा, जिससे इसकी जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक फिल्ट्रेशन सिस्टम भी लगाया जाएगा, जिससे तालाब में हमेशा स्वच्छ जल बना रहे।
गांव में लंबे समय से जोहड़ में गंदगी और ठोस कचरे के जमाव के कारण पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुका था, जिससे न केवल जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया था बल्कि जलभराव के कारण गांव के पर्यावरण और भूजल स्तर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रकाश यादव ने इस मुद्दे को एनजीटी में उठाया और लगातार संघर्ष किया। एनजीटी ने इस याचिका को गंभीरता से लेते हुए तालाब की सफाई, जल गुणवत्ता सुधार और उसके संरक्षण हेतु तत्काल कार्यवाही के आदेश दिए।
गांव के लोग इस फैसले से बेहद खुश
गांव के लोग इस फैसलें से बेहद खुश हैं क्योंकि इस जोहड़ के पुनर्निर्माण से उन्हें कई लाभ होंगे। सबसे पहले गांव में भूजल स्तर बढ़ेगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिलेगा। साथ ही, गांव के मवेशियों को भी स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सकेगा, जिससे पशुपालन में सुधार होगा। इसके अलावा, वर्षा जल संचयन की व्यवस्था होने से भविष्य में जल संकट की समस्या से बचाव संभव होगा। प्रशासन का दावा है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद यह जोहड़ जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण का एक आदर्श उदाहरण बनेगा।
जोहड़ की अहम भूमिका और सुधार की आवश्यकता होगी पूरी
खरखड़ा गांव के मुख्य जोहड़ का जीर्णोद्धार करना जरूरी था, क्योंकि ये जोहड़ न केवल ग्रामीणों के लिए आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि इनकी ऐतिहासिक और पारिस्थितिकीय महत्व भी है। प्रकाश यादव ने बताया कि बुजुर्गों के अनुसार एक समय था जब ग्रामीण इस जोहड़ के पानी का पीने के लिए उपयोग करते थे और इसके आसपास पेड़ों की छांव में बैठकर चर्चा किया करते थे। हालांकि, वर्षों से अन्य गाँवो में स्थित जोहड़ों की हालत खस्ता हो गई है।