कोसली। प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक खेती लाभ के साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। जीरो बजट प्राकृतिक खेती में लागत कम और मुनाफा ज्यादा होता है। इस प्रकार की खेती में खाद या रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं होता है। केवल देसी गाय के गोबर और मूत्र से ही पूरी खेती की जाती है। उक्त जानकारी एसडीएम होशियार सिंह ने कहीं हैं।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा प्राकृतिक तरह से नीम आदि से कीटनाशक बनाकर उनका इस्तेमाल किया जाता है। इस तरीके से खेती की लागत बहुत कम हो जाती है और इससे उत्पादन बढ़ता है, जिससे किसान को काफी ज्यादा मुनाफा होता है। ऐसे में किसान प्राकृतिक खेती को अपनाकर काफी लाभ ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सालों से रासायनिक उर्वरकों से इस्तेमाल से लगातार खराब होती जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाया जा सकता है। उन्होंने कोसली उपमंडल के किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर कृषि उत्पादों को विशुद्ध एवं लाभकारी बनाया जा सकता है। इस खेती को बढ़ावा देने और किसानों को इस खेती के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से सरकार ने प्राकृतिक कृषि बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है। सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए तीन साल उत्पादन आधारित योजना भी तैयार की गई है। जनता को रासायनिक खादों पर आधारित उत्पादों से मुक्ति दिलाने, भूमि की सेहत को सुधारने, भू-जल का संरक्षण करने और आमजन के स्वास्थ्य को बेहतर रखने के उद्देश्य से ही सरकार प्राकृतिक खेती पर फोकस कर रही है।
एसडीएम ने कहा कि उपमंडल में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में रासायनिक खादों व कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है, जिससे रासायनिक खादों व कीटनाशकों पर खर्च होने वाली राशि की बचत होती है।
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती के तहत गाय के गोबर एवं गोमूत्र की मदद से विशेष घोल तैयार किया जाता है, जिसका प्रयोग फसलों में किया जाता है और जमीन में मित्र कीट पैदा होते हैं। ऐसा करने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक करें।
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किसानों को दी फसल संबंधी जानकारी
रेवाड़ी। कोरटेवा एग्रीसाइंस ओर से गांव करावारा मानकपुर में फसल कटाई दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सतीश ने की। कार्यक्रम में 200 किसानों ने भाग लिया। किसानों के सामने सरसों की किस्म 1 एकड़ की थ्रेसिंग कराई गई, जिसका उत्पादन 12 क्विंटल प्राप्त हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को सरसों में अधिक पैदावार को लेकर लाभ मिले। वरुण डालाकोटी ने किसानों को सरसों की खेती को और अधिक लाभकारी बनाने के तरीके भी बताए। इस अवसर पर उधम सिंह, संदीप कुमार, श्रीपाल, वीर सिंह, राजेश, बोदन सिंह, रामकिशन, धर्मपाल, बिजेंदर, राजाराम व सत्य प्रकाश सहित अन्य किसान मौजूद रहे। संवाद