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Rewari News: धारूहेड़ा में ही बने नमो भारत का मेंटेनेंस डिपो, स्थानांतरण पर सवाल

Thu, 18 Jun 2026 12:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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एनसीआरटीसी की तरफ से लगा बोर्ड। स्रोत : स्थानीय नागरिक
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धारूहेड़ा। दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर के तहत प्रस्तावित मेंटेनेंस डिपो को धारूहेड़ा से पचगांव स्थानांतरित किए जाने की चर्चाओं के बीच क्षेत्र में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। लोगों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर नमो भारत परियोजना का मेंटेनेंस डिपो मूल प्रस्ताव के अनुसार धारूहेड़ा में ही स्थापित किए जाने की मांग की है।
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम द्वारा पूर्व में धारूहेड़ा में डिपो के लिए भूमि चिह्नित की गई थी। इतना ही नहीं संबंधित स्थल पर दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी आरआरटीएस कॉरिडोर-भूमि मेंटेनेंस डिपो के लिए लिखे आधिकारिक बोर्ड भी लगाए गए थे। इससे स्थानीय लोगों और निवेशकों में यह विश्वास बना कि धारूहेड़ा इस महत्वाकांक्षी परियोजना का एक प्रमुख परिचालन केंद्र बनेगा।
धारूहेड़ा हरियाणा के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक नगरों में से एक है और दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर राजस्थान का प्रवेश द्वार माना जाता है। यहां पहले से विकसित औद्योगिक आधार, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं जो किसी भी बड़े मेंटेनेंस डिपो के संचालन के लिए उपयुक्त है।
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यदि डिपो धारूहेड़ा में स्थापित होता है तो इससे हजारों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही दक्षिण हरियाणा में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। क्षेत्र में नए निवेश आकर्षित होंगे तथा पहले से स्थापित उद्योगों को भी लाभ पहुंचेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि डिपो के लिए भूमि चिह्नित करने और प्रारंभिक तैयारियों पर पहले ही काफी कार्य किया जा चुका है। ऐसे में स्थान परिवर्तन से न केवल पूर्व की गई योजना प्रभावित होगी, बल्कि क्षेत्र के लोगों की विकास संबंधी अपेक्षाओं को भी झटका लगेगा।
इंसेट
जनता के सामने रखे जाएं स्थानांतरण के कारण
ज्ञापन में लोगों ने सरकार और एनसीआरटीसी से मांग की है कि यदि डिपो को स्थानांतरित करने का कोई प्रस्ताव है तो उसके कारण सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही अंतिम निर्णय लेने से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों, उद्योग संगठनों और आम नागरिकों से भी परामर्श किया जाए। धारूहेड़ा, रेवाड़ी जिला और दक्षिण हरियाणा के लोगों को इस राष्ट्रीय परियोजना से मिलने वाले विकास और रोजगार के अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को संतुलित क्षेत्रीय विकास की भावना को ध्यान में रखते हुए डिपो को धारूहेड़ा में ही बनाए रखने का निर्णय लेना चाहिए।
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