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मूंदी के खेत हुए जलमगन, राजस्थान से आने वाले पानी को लेकर चिंता में किसान

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बारिश के पानी से जलमग्न खेत। - फोटो : Rewari
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खोल। रविवार शाम से लगातार 20 घंटे से क्षेत्र में हुई जोरदार बारिश के चलते गांव मूंदी-नांगल, बास-बटोड़ी, मामड़िया ठेठर के खेत जलमग्न हो गए हैं। खेत में फसल दिखाई नहीं दे रही बल्कि, दूर-दूर तक पानी ही पानी दिखाई पड़ रहा है।
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उल्लेखनीय है कि हर साल राजस्थान की पहाड़ियों से बारिश का पानी आता है। जिसका आज तक कोई समाधान नहीं हुआ है। मूंदी-नांगल में पाली-गोठड़ा रेलवे लाइन के अंडरपास से राजस्थान की ओर से पानी आ रहा है। बारिश के दिनों में राजस्थान से आने पानी की वजह से लोग एक सीजन की फसल उठाते हैं। वहीं दूसरे सीजन की फसल की बुवाई तो की जाती है, लेकिन वह खराब हो जाती है। अब भी यही हो रहा है। खेतों जलभराव होने से बाजरे व कपास की फसल खराब हो सकती है। मूंदी निवासी कमल सिंह, ब्रह्मानंद, शेर सिंह, महेंद्र, अजय कुमार व जितेन्द्र आदि ने बताया कि हर साल बरसात के दिनों में राजस्थान से भारी मात्रा में पानी आता है। इस पानी से गांव मामड़िया अहीर, मामड़िया ठेठर, मामड़िया आसमपुर, बास बटोड़ी व प्राणपुरा के किसानों को हानि उठानी पड़ती है। दो दिन से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद ग्रामीण चिंतित हैं, क्योंकि फसल में पानी अधिक दिन खड़ा होने से वह खराब हो जाती है। जिससे किसानों को आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। किसानों ने बताया कि यह समस्या आज की नहीं, वर्षों की है। लेकिन जिला प्रशासन ने राजस्थान से आने वाले पानी को रोकने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। जिसके चलते किसान बेबस नजर आते हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि राजस्थान से आने वाले पानी को रोकने का प्रबंध करें। ताकि किसान अपनी फसल का लाभ उठा सकें। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खेतों में पटवारी को मौके पर भेजकर मौका मुआयना करवाकर उचित मुआवजा राशि दी जाए।
पूरे क्षेत्र में बारिश का असर
दो दिन से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का पूरे क्षेत्र में असर दिखाई पड़ रहा है। बाजरे व कपास के खेतों में पानी भर गया है। लगातार बारिश होने से पानी कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। लोगों का कहना है कि ऐसी बारिश तो 20 साल पहले हुए थी, जब हर खेत जलमग्न हो गए थे। किसानों ने बताया कि ज्यादा बारिश फसल को नुकसान पहुुंचा सकती है। जिन किसानों ने बाजरे की बिजाई लेट की थी, वह फसल पानी के बहाव से मिट्टी के नीचे दब गई है। अब किसानों को दोबारा ही बुवाई करनी पड़ेगी।
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