रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू) मीरपुर में विभिन्न संकायों में सीटों की संख्या 60-60 के स्थान पर 20-20 किए हुए दो सत्र बीत चुुके हैं। मांग के बावजूद इसके अभी तक सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई है। ऐसे में दो जिलों के विद्यार्थियों को यहां विवि होने के बाद भी रोहतक व दिल्ली के भरोसे परास्नातक करना पड़ता है।
बता दें कि आईजीयू से रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ जिलों के 130 कॉलेज संबद्ध हैं। इनमें से 40 डिग्री कॉलेज हैं। ऐसे में इन कॉलेेेजों से प्रत्येक साल डिग्री लेने वाले छात्रों की संख्या पांच हजार से ज्यादा रहती है। लेकिन विज्ञान संकाय मेें आईजीयू कैंपस में सीटों की संख्या कम होने का खामियाजा इन विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है।
बता दें कि आईजीयू की एग्जिक्यूटिव कमेटी (ईसी) ने 8 जून 2019 को हुई मीटिंग में एमएससी मैथ, एमएससी मैथ विद कंप्यूटर साइंस, फिजिक्स, बॉटनी, जुलॉजी एवं एमएसी एनवायरमेंटल साइंस में सीटों की संख्या घटाकर 60-60 से 20-20 करने को फैसला लिया था। छात्र संगठनों से लेकर राजनीतिक संगठनों ने भी इस फैसले का विरोध किया था। लेकिन तब विवि प्रशासन की ओर से लैब के अभाव में सीटें कम करने का हवाला दिया गया था। लेकिन अब कई लैब बन चुकी हैं तो सीटों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए।
लैब नहीं होने का हवाला देकर सीटें की गई थीं कम
विवि की ओर से सीटें कम करने के पीछे लैब नहीं होने का हवाला दिया गया था। विवि प्रशासन ने कहा था कि यूजीसी गाइडलाइन के तहत 15-20 विद्यार्थियों के लिए लैब की जरूरत होती है। ऐसे में एक संकाय की 60 सीटों के लिए तीन लैब की जरूरत है। वहीं केमिस्ट्री को जोड़कर अकेले साइंस विभाग के 7 संकायों के लिए 21 लैब होनी चाहिए। विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक ज्ञान नहीं मिलने के चलते वे आगे जाकर पिछड़ जाते हैं। लेकिन विवि प्रशासन यह बताने में विफल रहा कि जो विद्यार्थी यहां से पास आउट हो चुके हैं, उनके भविष्य का क्या होगा।
दो साल से बंद एलएलएम नहीं हो सकी शुरू
विवि प्रशासन की ओर से एलएलएम संकाय को 2019 बंद ही कर दिया था। विवि प्रशासन को विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन दोबारा शुुरू नहीं किया गया। एलएलबी कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि एलएलएम करने के लिए अब उन्हें किसी अन्य विवि में जाना पड़ेगा। इसलिए उनके पास विरोध करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं है। वहीं दूसरी ओर विवि का तर्क है कि इस विभाग में स्थायी एक भी प्रोफेसर नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों के हित में ही एलएलएम कोर्स को बंद करने का निर्णय लिया गया
आईजीयू मीरपुर के परीक्षा नियंत्रक सुरेश धनेरवाल ने बताया कि आईजीयू में बीते दो साल के दौरान फिजिक्स, केमेस्ट्री, बॉटनी, जुलॉजी कंप्यूटर सहित वीसी सर ने कई लैब का निर्माण कराया है। शिक्षा की गुणवत्ता जरूरी है, इसके चलते सीटों की संख्या कम की गई थी। अब लैब की संख्या बढ़ी है तो ऐसे में अगले सत्र से सीटों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है।