कोसली उपमंडल के गांव मुमताजपुर को 1832 में नाहड़ के पांचवें नवाब मुमताज अली ने बसाया था। ग्रामीणों के अनुसार मुमताज अली को कोई संतान नहीं थी, इसलिए उसने आसपास के गांवों के लोगों को यहां लाकर बसाया। ग्रामीणों द्वारा धूम्रपान व शराब सेवन नहीं करने से यह गांव अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का काम कर रहा है। 800 से अधिक मतदाताओं वाले इस गांव में करीब 1500 लोगों की आबादी है। ग्रामीणों में बाबा भोमिया व भगवान शिव व कृष्ण की मान्यता है। यादव व गुर्जर जाति बाहुल्य इस गांव में धूम्रपान व शराब को निषेध माना जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। यहां के 80 से अधिक युवा सेना में भर्ती होकर देशसेवा कर रहे हैं। हालांकि सुविधाओं के नाम पर गांव में प्राथमिक स्कूल व आंगनबाड़ी ही है। अन्य सुविधाओं के लिए ग्रामीण अनेक बार संबंधित विभागों के अधिकारियों से मिलकर मांग कर चुके हैं।
गांव के लोग सभी आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं। मान्यता के अनुसार गांव में कोई भी धूम्रपान नहीं करते हैं। नाहड़ के नवाब द्वारा बसाए गए इस गांव के युवाओं में सेेना में भर्ती होने का जज्बा कूट-कूट कर भरा है।
-शेरसिंह
युवाओं के जज्बे का ही परिणाम है कि छोटे से गांव में 70 से अधिक युवक सेनाओं में भर्ती होकर देेश की सेवा कर रहे हैं। ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय खेतीबाड़ी व पशुपालन है। हालांकि मूलभूत सुविधाओं का आज भी अभाव है।
-हरबीर
गांव के लोग धार्मिक मान्यताओं को मानने वाले हैं। इसके अलावा सभी ग्रामीण मिलजुल कर रहते हैैैं तथा विकास कार्यों में भी पूरा सहयोग करते हैं। गांव के लोग बिना सरकारी बाध्यता के धूम्रपान व शराब आदि का सेेवन करने से बहुत दूर रहते हैं।
-दीपचन्द
गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेतीबाड़ी व पशुपालन है, लेकिन पशुपालकों के लिए कोई सुविधाएं नहीं है। ग्रामीणों द्वारा कई बार अधिकारियों से मिलकर सुविधाओं की मांग की जा चुकी है। इसके अलावा सभी ग्रामीण मिलजुल कर रहते हैं।
-रणबीर
गांव में चारों ओर से सड़कों का जाल बिछा हुआ है, लेकिन यातायात सुविधा का अभाव है। जिसके कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा गांव में अन्य सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है।
-देवराज
गांव में प्राथमिक पाठशाला है। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए करीब 4 किलोमीटर दूर नाहड़ जाना पड़ता है, लेकिन यातायात के अभाव में अधिकांश विद्यार्थी पैैदल ही स्कूल जाते हैं। ग्रामीणों द्वारा कई बार स्कूल अपग्रेड को लेकर अधिकारियों से मांग की जा चुकी है।
-कैलाश
गांव के अधिकांश युवा सेना में भर्ती हो रहे हैं। गांव में प्रभुदयाल व सिंहराम नामक दो स्वतंत्रता सेनानी भी हुए हैं, जो युवाओं के लिए प्ररेणादायक हैं। सेना में भर्ती होने के लिए अभ्यास करने वाले युवाओं का नजारा सुबह-शाम देखने लायक होता है।
-शेरसिंह सेवानिवृत्त सैनिक