ऑनलाइन तबादला नीति के विरोध में ज्ञापन सौंपते एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारी। स्रोत : एसोसिएशन
रेवाड़ी। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन ने स्वास्थ्य विभाग की एमओटीपी प्रक्रिया के विरोध में लगातार दूसरे दिन मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा। एसोसिएशन ने एमपीएचडब्ल्यू वर्ग को ऑनलाइन तबादला नीति से बाहर रखने, खाली पदों पर नियमित भर्ती करने और रेशनलाइजेशन के नाम पर पद समाप्त नहीं करने की मांग की।
एसोसिएशन के जिला प्रधान दिनेश यादव ने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता के नाम पर ऑनलाइन तबादला नीति शुरू की थी, लेकिन रेशनलाइजेशन के तहत कई जिलों में पद समाप्त किए जा रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। प्रदेश की विभिन्न ग्राम पंचायतों और जनप्रतिनिधियों ने भी पदों को समाप्त नहीं करने तथा खाली पदों को नियमित भर्ती से भरने की मांग की है।
एसोसिएशन के अनुसार एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारी टीकाकरण, जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, मलेरिया और डेंगू जैसे रोगों की रोकथाम, सर्वेक्षण और जन-जागरूकता कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से सेवाएं देने के कारण कर्मचारियों का लोगों के साथ विश्वास का संबंध बनता है। तबादलों से इस व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
खाली पदों पर भर्ती की मांग
एसोसिएशन के राज्य महासचिव सहदेव सांगवान ने दावा किया कि प्रदेश में एमपीएचडब्ल्यू मेल के करीब 1000, महिला के 700 और सुपरवाइजर के सैकड़ों पद खाली हैं। उन्होंने सरकार से सीईटी पास डिप्लोमाधारकों को रोजगार देने और खाली पदों को नियमित भर्ती से भरने की मांग की। साथ ही दूरदराज के जिलों नूंह (मेवात) और पलवल में लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को राहत देने के लिए ऑफलाइन तबादलों का विकल्प खोलने की अपील की। दिनेश यादव ने कहा कि मांगें नहीं मानी गईं और एमओटीपी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो एसोसिएशन आंदोलन की रणनीति बनाएगी।