हरियाणा कला परिषद एवं भरतमुनि कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में बाल भवन के ऑडिटोरियम में प्रसिद्ध नाटक खामोश अदालत जारी है का मंचन किया गया। वरिष्ठ रंगकर्मी मदन डागर के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने अपनी सशक्त कथा और जीवंत अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा।
यह नाटक दिग्गज नाटककार विजय तेंदुलकर की चर्चित कृति खामोश अदालत जारी है पर आधारित है जो पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं पर थोपे गए सामाजिक और नैतिक दबावों को उजागर करता है। कहानी की मुख्य पात्र लीला बेनारे एक स्वतंत्र विचारों वाली शिक्षिका हैं जिनके इर्द-गिर्द पूरा कथानक घूमता है।
नाटक की शुरुआत एक शौकिया मंडली की ओर से किए जा रहे मॉक ट्रायल से होती है जो धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेता है। खेल-खेल में शुरू हुआ यह मुकदमा लीला बेनारे के निजी जीवन, उनके प्रेम संबंधों और गर्भावस्था को लेकर उस पर मानसिक दबाव और सामाजिक उत्पीड़न का माध्यम बन जाता है।
इस प्रक्रिया के जरिए नाटक समाज की दोहरी मानसिकता और पाखंड को तीखे अंदाज में प्रस्तुत करता है। मंचन के दौरान कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया। सुखातामे की भूमिका डॉ. अंकुर खेर ने निभाई, जबकि मिसेज काशीकर के किरदार में कुमारी तानिया नजर आईं।
सामंत की भूमिका ललित वर्मा, रोकड़े की भूमिका जितेश, मिस्टर काशीकर का किरदार हिमांशु और लीला बेनारे की भूमिका हिमानी ने प्रभावशाली ढंग से निभाई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
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नाटक में दिया ये संदेश
नाटक में यह दिखाया गया कि कैसे समाज एक स्वतंत्र महिला के निर्णयों को स्वीकार नहीं करता और उसे नैतिकता के नाम पर कठघरे में खड़ा कर देता है। अंत में बेनारे को दोषी ठहराया जाना समाज की संवेदनहीनता और महिलाओं के अधिकारों के दमन को दर्शाता है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नेहा शर्मा पहुंची। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी सतीश मस्तान, राम चरण, विजय शर्मा, मनोज शर्मा, संतोष कुमारी, कशिश बत्रा, नरेंद्र वर्मा, ओम प्रकाश बत्रा, शुभम आदि उपस्थित रहे।
नाटक का मंचन करते कलाकार। स्रोत : संस्था