रेवाड़ी। जिले की शैक्षिक परंपरा ने महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह तथ्य न केवल रेवाड़ी के लिए गौरव का विषय है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।
1880 के दशक में लाला लाजपत राय के पिता मुंशी राधाकृष्णन भाड़ावास गेट स्थित भाड़ावास गेट स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (तत्कालीन राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय) में उर्दू शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। लाला लाजपत राय ने कक्षा छठी की पढ़ाई इसी विद्यालय से की थी।
विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं बल्कि नैतिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना को विकसित करने वाला संस्थान रहा। विद्यालय का वातावरण, शिक्षकों का मार्गदर्शन और अध्ययनशील परिवेश ने बालक लाजपत राय के मन में नैतिकता, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना के बीज बोए। यही कारण रहा कि आगे चलकर वे केवल एक शिक्षाविद् या वकील ही नहीं बल्कि प्रखर राष्ट्रवादी नेता के रूप में उभरे।
बुधवार को भाड़ावास गेट स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में लाला लाजपत राय की जयंती मनाई गई। प्राचार्य विनोद यादव के मार्गदर्शन में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।
डॉ. नम्रता सचदेवा ने कहा कि लाला लाजपत राय ने भारतीय राजनीति को याचिकाओं के दौर से निकालकर अधिकारों के दौर तक पहुंचाया। प्राचार्य ने कहा कि यह विद्यालय के लिए गर्व का विषय है कि जिसमें आज विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।लाला लाजपत राय जैसे महान युगपुरुष के आदर्शों को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
कार्यक्रम में राजपाल यादव, राजेश कुमारी, शालू और जितेंद्र यादव ने कहा कि लालाजी के भीतर नैतिकता, साहित्य प्रेम और स्वाभिमान के बीज इसी विद्यालय की चहारदीवारी में पड़े। उन्होंने उनके बहुआयामी व्यक्तित्व, स्वदेशी आंदोलन में नेतृत्व, शिक्षा के प्रसार और राष्ट्र निर्माण में योगदान को स्मरण किया।