सैनिक विश्रामगृह परिसर में पड़ा मलबा। संवाद
- फोटो : chineni news
कोसली। शहीदों की धरती कोसली अपनी सैन्य परंपरा और देशभक्ति के लिए जानी जाती है। करोड़ों रुपये की लागत से बना सैनिक विश्रामगृह अब देखभाल के अभाव में जर्जर होता जा रहा है।
वर्ष 1984 में यहां शहीद स्मारक की आधारशिला रखी गई थी। उसी परिसर में सैनिक विश्रामगृह का निर्माण कराया गया था। सैनिकों और उनके परिजनों के लिए यह भवन सम्मान और सुविधा का प्रतीक माना गया था।
करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह इमारत आज अपनी बदहाली पर खुद आंसू बहाने को मजबूर है। रखरखाव के अभाव और स्टाफ की कमी ने इसकी उपयोगिता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विश्रामगृह में ठहरने के लिए वातानुकूलित कमरे बनाए गए हैं लेकिन सफाई और रखरखाव के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं।
भवन की दीवारों में दरारें पड़नी शुरू हो गई हैं और परिसर में पुरानी बिल्डिंग का मलबा अभी तक नहीं हटाया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र अव्यवस्थित और बदहाल नजर आ रहा है। फिलहाल व्यवस्था को लेकर टेंडर जारी कर दिया गया है।