रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू) मीरपुर को भारत में कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ आईयूआईएन-डीआरआर की प्रतिष्ठित सदस्यता मिली है।
प्रधानमंत्री की ओर से आपदा प्रबंधन पर 10 सूत्रीय एजेंडा दिया है। क्षमता, कौशल और ज्ञान के अंतर को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री के 10 सूत्रीय एजेंडे के एजेंडा 6 में भारत में आपदा के मुद्दों पर काम करने के लिए विश्वविद्यालयों का एक नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
विवि के प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए भारत विश्वविद्यालय और संस्थान नेटवर्क (आईयूआईएन-डीआरआर) की स्थापना की है। आपदाएं हर साल सैकड़ों हजारों जीवन को अस्त-व्यस्त कर देती हैं। प्रत्येक आपदा का लोगों और संपत्ति दोनों पर स्थायी प्रभाव पड़ता है। आपदा के लिए तैयार रहने से डर की चिंता और नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह मंच हमें आपदाओं से होने वाले जोखिमों को कम करने के क्षेत्र में समाज की सेवा करने का मौका देगा। इस नेटवर्क में एनआईडीएम के अलावा कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय और संस्थान आपस में और आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर काम कर रहे हितधारकों के बड़े समूह के बीच ज्ञान, आपदा जोखिम प्रबंधन से संबंधित संसाधनों को साझा करने के लिए एक साथ आएंगे।
आईयूआईएन-डीआरआर के सदस्य शिक्षा और शोध करने, निष्कर्षों को साझा करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और आपदा जोखिमों के कारण तेजी से खतरे में पड़ने वाले देश में आगे बढ़ने के तरीके खोजने के लिए निकट सहयोग में काम करते हैं।
इस उपलब्धि पर इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के कुलपति प्रो. जेपी यादव और कुलसचिव प्रो. प्रमोद कुमार ने आईयूआईएनडीआरआर-एनआईडीएम की नोडल अधिकारी डॉ. पिंकी रानी को आपदा प्रबंधन से संबंधित मुद्दों पर उनके प्रयासों के लिए बधाई दी।