संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण थायराइड की बीमारी का ग्राफ बढ़ रहा है। नागरिक अस्पताल के डॉक्टर गौरव ने बताया कि यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखने को मिल रही है। समय रहते पहचान और सही उपचार से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. गौरव ने बताया कि थायराइड गले में स्थित एक छोटी ग्रंथि होती है जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने का काम करती है। जब यह ग्रंथि जरूरत से ज्यादा या कम हार्मोन बनाती है तो शरीर में कई प्रकार की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इसी स्थिति को थायराइड रोग कहा जाता है।
थाइराइड के प्रमुख प्रकार
उन्होंने बताया कि थायराइड मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। हाइपोथायराइड में थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, कब्ज और कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। हाइपरथायराइड में वजन कम होना, घबराहट, अधिक पसीना आना, नींद कम आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। डॉ. गौरव के अनुसार तनाव, अनियमित दिनचर्या, पोषण की कमी, आनुवंशिक कारण और आयोडीन की कमी थायराइड के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को गर्भावस्था और बढ़ती उम्र में नियमित जांच करवानी चाहिए। डॉ. गौरव ने कहा कि यदि लंबे समय तक थकान, वजन में अचानक बदलाव या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए। नियमित दवा और सही उपचार से थायराइड को नियंत्रित कर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।
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बचाव के उपाय
उन्होंने लोगों को संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने और तनाव से दूर रहने की सलाह दी। आयोडीन युक्त नमक का उपयोग करने और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लेने की भी अपील की गई।