लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की ओर से 2006 में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) एक्ट बनाया गया था। जिले में आलम यह है कि यहां पर सैकड़ों होटल एवं रेस्टोरेंट होने के बावजूद 13 साल में करीब 50 संचालक ही लाइसेंस बनवाए हैं, जबकि जिले में शहर व हाईवे को जोड़कर 500 से अधिक होटल व रेस्टोरेंट हैं। एफएसएसएआई नियमानुसार खाद्य पदार्थ बनाने वाले स्थानों पर सफाई के साथ ही बनाने वाले कर्मचारियों का फीट रहना भी जरूरी है। इसके लिए कर्मचारियों को बतौर मेडिकल सर्टिफिकेट खाद्य सुरक्षा विभाग के पास जमा करना जरूरी होता है। ऐसे में लोगों को किस गुणवत्ता के खाद्य पदार्थ मिल रहे हैं, बड़ा सवाल है। 26 अक्तूबर को शहर की एक बर्फी की दुकान का सैंपल फेल पाया गया था। हालांकि इसके बाद अधिकारियों की ओर से कार्रवाई भी शुरू की गई थी।
विभाग सिर्फ सैंपलिंग तक ही सीमित
हरियाणा सरकार द्वारा लाइसेंस के लिए तारीख बढ़ाने एवं उच्चाधिकारियों द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलने के चलते खाद्य आपूर्ति विभाग महज सैंपलिंग तक ही सीमित रहते हैं। सैंपलिंग में यदि खाद्य पदार्थ सब स्टैंडर्ड पाया जाता है तो अधिकारी मामले को एडीसी के पास भेजते हैं। यहां पर एडीसी पंद्रह हजार तक जुर्माना लगा सकते हैं। लेकिन मिलावट का खेल करने वाले लोगों के लिए यह मामूली राशि है। ऐसे में मिलावट करने वालों पर लगाम लगने से बच जाती है।
दस लाख रुपये एवं उम्र कैद की सजा का प्रावधान
एफएसएसएआई के अनुसार खाद्य पदार्थ बनाने वाली जगह का नक्शा देने के साथ ही अन्य रिपोर्ट खाद्य आपूर्ति विभाग के पास जमा करानी होती है। एक्ट के तहत यदि किसी खाद्य पदार्थ को खाने से काई बीमारी या दुर्घटना हो जाती है तो संचालक पर दस लाख रुपये जुर्माने के साथ उम्र कैद की सजा हो सकती है। यदि अधिकारी ठीक ढंग से नियमों का पालन करवाएं तो लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के मन में कार्रवाई का डर रहेगा।
होटल तो दूर रेहड़ी संचालकों का भी पंजीकरण जरूरी
जिले में कहीं पर भी खाद्य पदार्थों से जुड़ा काम करने के लिए सर्वप्रथम पंजीकरण कराना जरूरी है। रेहड़ी संचालक हो या होटल मालिक सभी को नियम का पालन करना जरूरी है। पंजीकरण की फीस 100 से लेकर तीन हजार रुपये तक हैं। बावजूद इसके दस लाख से ज्यादा की आबादी वाले जिले में कुल 300 लोगों ने ही पंजीकरण कराया है।
स्टाफ की कमी से कार्रवाई में होती है देरी : एनडी शर्मा
खाद्य सुरक्षा अधिकारी एनडी शर्मा ने कहा कि समय-समय पर मिलावट खोरों पर कार्रवाई की जाती है। खाद्य पदार्थ बनाने वाली जगहों को साफ रखने के साथ ही बनाने वालों को मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराना भी जरूरी होता है। जल्द ही विभाग को पूरा स्टाफ मिल जाएगा, अब तेजी से कार्रवाई की जाएगी।