मनेठी एम्स निर्माण की अगुवाई कर रहे डहीना खंड के गांव मनेठी के सरपंच द्वारा हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने के आरोपों के बाद डीसी यशेंद्र सिंह ने उन्हें निलंबित कर दिया है। वहीं सरपंच श्योताज सिंह ने इसे अपने खिलाफ साजिश बताया है। बता दें कि सरपंच श्योताज सिंह के खिलाफ गांव में ही स्थित जोहड़ी वाली ढाणी स्थित साझे की गौण (बैलों से सिंचाई के जमाने में बनाया गया जोहड़नुमा स्थान) में गंदा पानी डाले जाने का एक मामला हाई कोर्ट में चल रहा था। कुछ लोगों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था तथा ग्राम पंचायत द्वारा ढाणी में गंदा पानी छोड़े जाने पर विरोध जताया था। इस मामले में सरपंच से न्यायालय द्वारा जवाब भी मांगा गया था। बताया जा रहा है कि इसी मामले में सरपंच द्वारा स्पष्टीकरण नहीं देने पर अदालत ने इसे अपनी अवमानना मानते हुए सरपंच श्योताज सिंह को निलंबित करने के आदेश जारी किए थे। इन्हीं आदेशों पर अब सरपंच को निलंबित किया गया है। वहीं सरपंच श्योताज सिंह के खिलाफ गांव के ही कुछ लोगों ने विकास कार्यों में अनियमितताएं बरतने की भी शिकायतें की हुई हैं। इन मामलों में भी जांच चल रही है।
एम्स संघर्ष समिति के प्रधान है श्योताज
मनेठी गांव के सरपंच श्योताज सिंह एम्स संघर्ष समिति के प्रधान भी हैं। उनका कहना है कि इस मामले में जानबूझकर उनको निशाना बनाया गया है। उसकी कोई गलती नहीं है। एम्स आंदोलन से उसको हटाने के लिए भी यह दबाव बनाया गया है। अदालत के आदेशों पर अगर ऐसा हुआ है तो वह न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।