हरियाणा के रेवाड़ी के कोसली क्षेत्र के नेहरूगढ़ गांव के युवा पर्वतारोही ने उत्तरी अमेरिका के अलास्का में स्थित सबसे ऊंची चोटी देनाली को फतेह कर लिया है। 6190 मीटर ऊंची चोटी पर नरेंद्र यादव ने भारत की तरफ से प्रतिनिधित्व किया था।
नरेंद्र यादव इस पर्वत पर चढ़ने वाले विश्व के पहले युवा के साथ सबसे तेज आरोहण (44 घंटे और 42 मिनट) और अवरोहण (27 घंटे 45 मिनट) कुल अवधि 73 घंटे और 10 मिनट में पूरा कर विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले देनाली पर फतेह कर वर्ल्ड रिकाॅर्ड बनाने वाला युवा 31 साल 1 महीने 25 दिन का था।
नरेंद्र यादव ने 29 साल 6 महीने 8 दिन में इस रिकॉर्ड को तोड़कर अपने नाम कर विश्व के पहले युवा पर्वतारोही बन गए हैं। इसमें पूरे विश्व से पर्वतारोही शामिल हुए थे। इसे आईपीएल बायोलॉजिकल ने प्रायोजित किया था।
नरेंद्र 15 जून को तालकीतना से चार्टर विमान से बेस कैंप पहुंचकर पैदल कैंप पहुंचे थे। 16 जून को कैंप 2, 17 जून को कैंप 3, 18 जून को कैंप 3 से 4 में मौसम अभ्यास के लिए जाकर वापस कैंप 3 में आए। 19 जून को कैंप 4 पहुंचे और 20 जून को विश्राम किया। 21 जून को मौसम अभ्यास के लिए कैंप 5 में जाकर कैंप 4 आए। 22 जून को कैंप 5 पहुंचे व 23 जून को रात 10 बजकर 29 मिनट पर तिरंगा लहराकर भारत का नाम विश्व पटल पर अंकित किया।
ठंड और तेज हवा के कारण घातक है पर्वत : नरेंद्र
नरेंद्र यादव ने बताया कि देनाली को घातक पर्वत भी कहा जाता है। यह पर्वत दुर्गम है। अत्यधिक ठंड और तेज हवा से चढ़ाई और खतरनाक बना देता है। जोखिम से भरा होने के कारण बहुत कम पर्वतारोही इस पर्वत पर चढ़ने में कामयाब हुए हैं।
सात महाद्वीपों को फतेह करने का है सपना
सेना के जवान कृष्णचंद के पुत्र का सपना दुनिया के सभी सात महाद्वीपों पर फतेह करना है। नरेंद्र ने पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतेह कर कई रिकाॅर्ड बनाए हैं। 2012 में पर्वतारोहण के बेसिक, 2013 में एडवांस, 2015 में एमओआई, 2022 में सर्च एंड रेस्क्यू के साथ सभी कोर्स पास किए हैं। इसमें माउंट एवरेस्ट को 2016 व 2022 में 6 दिन में बिना अनुकूलन के फतेह किया। किलिमंजारो को तीन बार, एलब्रुस को ट्रेवल्स में दो बार, कोजास्को और ऑस्ट्रेलिया की 10 सबसे ऊंची चोटियों को दो बार फतह किया है। इसके साथ-साथ दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी एकंकागुआ को फतेह किया है।
12 साल की उम्र में जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों पर चढ़कर पर्वतारोहण की शुरूआत की
स्कूली पढ़ाई के दौरान 12 साल की उम्र में ही नरेंद्र ने जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों पर चढ़कर अपने पर्वतारोहण की शुरूआत कर दी थी। वर्ष 2008 से इन्होंने नियमित तौर से पर्वतारोहण का अभ्यास शुरू कर दिया था। इसके बाद 19 वर्ष की आयु में 6512 मीटर ऊंची भागीरथी-टू और 5612 मीटर ऊंची डीकेडी-टू के साथ कालिंदी पास और वासुकी ताल पास, लेह, गढ़वाल चोटी को फतेह करके सबसे कम उम्र का पर्वतारोही साबित हुआ था। इसके साथ विश्व के सभी वर्ल्ड रिकॉर्ड संस्थाओं ने वर्ल्ड किंग का सम्मान दिया है। अब अगला लक्ष्य अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी विंसन है।