फोटो : 27श्री कृष्ण भवन में प्रवचन देते स्वामी युगल शरण। स्रोत : प्रवक्ता
रेवाड़ी। श्री कृष्ण भवन में चल रहे स्वामी कृपालु महाराज के प्रमुख प्रचारक स्वामी युगल शरण के प्रवचन का बुधवार को दूसरा दिन रहा। युगल शरण ने बताया कि प्रत्येक जीव आस्तिक होते हैं। संसार में कोई भी जीव बिना प्रयोजन से कोई भी कार्य नहीं कर सकता। भगवान ही हमारा वास्तविक सम्बंधी है।
परोपकार रूपी कार्य से संत और भगवान को सुख मिलता है और पर उपकार रूपी कार्य से दुष्ट को क्षणभंगुर सुख मिलता है। अतएव ये सिद्ध हुआ कि सुख प्राप्ति सबका प्रयोजन है। प्रत्येक जीव आनंद प्राप्ति के लिए ही कार्य करता है। हम जो कर्म करते हैं वह दो प्रकार की है- शारीरिक कर्म, शारीरिक प्लस मानसिक कर्म है।
आगे बताया कि हमने सुना है कि हम आत्मा हैं लेकिन हमारा अनुभव नहीं है इसलिए हम मानते नहीं कि मैं आत्मा हूं। जब हमलोग यह नहीं जानते हैं कि मैं कौन हूं तो मेरा कौन है कैसे जानेंगे?
हम बोलते हैं कि यह मेरा शरीर है। एक हम और एक हमारा शरीर। हमने अपने आपको शरीर माना और इसे सुख देने का लक्ष्य बना लिया। यदि आपने आपको आत्मा मानते, तो फिर आत्मा को सुखी कैसे किया जायेगा, यह हमारा लक्ष्य होता। जब मैं आत्मा हूँ तो मैं का कौन? परमात्मा या भगवान। हमने तो अभी तक नहीं जाना कि मैं कौन हूं।