रेवाड़ी।
शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के लिए अब चाइल्ड वेलफेयर फंड से खर्च की सीमा बढ़ाकर 10 हजार से 5 लाख रुपये कर दी है। पहले यह सीमा 5 हजार से 15 हजार रुपये तक ही निर्धारित थी। स्कूल प्रमुखों को छोटे मरम्मत कार्य तुरंत कराने के अधिकार भी दिए गए हैं।
नए नियमों के लागू होने से स्कूल स्तर पर छोटे-छोटे सुधार कार्य तेजी से पूरे किए जा सकेंगे। विभाग के अनुसार 10 हजार से 5 लाख रुपये तक के कार्य स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की सिफारिश पर कराए जाएंगे जबकि इनकी निगरानी जिला शिक्षा अधिकारी करेंगे।
दरअसल, विभागीय निरीक्षण में सामने आया था कि जिले के कई स्कूलों में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय और बाउंड्री वॉल की स्थिति ठीक नहीं है। कई स्थानों पर नल और शौचालय खराब पड़े हैं। वहीं स्कूलों में कचरा और जलभराव की समस्या बनी हुई है।
इन कमियों को दूर करने के लिए सरकार ने बाउंड्री वॉल, क्षतिग्रस्त दीवारों, पेयजल व्यवस्था, शौचालयों की मरम्मत और स्वच्छता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी है। निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्कूल में जमा कचरे को तुरंत हटाया जाए और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए।
हालांकि किसी भी कार्य पर खर्च सीधे तौर पर नहीं किया जाएगा बल्कि इसके लिए स्कूल स्तर पर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का गठन अनिवार्य होगा। कमेटी की सिफारिश के बाद ही खर्च की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
नए फैसले से विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी
बता दें कि जिले में पहली से आठवीं तक 393 और 9वीं से 12वीं तक 150 विद्यालय संचालित हैं। इनमें कक्षा पहली से पांचवीं तक करीब 20 हजार 680 कक्षा छठी से आठवीं तक लगभग 14 हजार 700 और कक्षा 9वीं से 12वीं तक करीब 16 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे में नए फैसले से हजारों विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
वर्जन
चाइल्ड वेलफेयर फंड से खर्च करने की सीमा बढ़ाई गई है। अब विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, दीवारों की मरम्मत और साफ-सफाई जैसे कार्य समय पर पूरे कराए जा सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को काफी लाभ मिलेगा।
दुष्यंत सिंह, प्राचार्य, पीएमश्री विद्यालय बिठवाना